मेनार मेले में उमड़ी खरीदारों की भीड़, 100 से अधिक पशु पहुंचे, ‘जगदेव कंकाली’ ने बांधा समां
मेनार के 28वें श्री अम्बामाता आमजन एवं पशुमेले में चौथे दिन खरीदारों की भीड़ उमड़ी। पशु बाजार में 100 से अधिक पशु पहुंचे, वहीं ‘जगदेव कंकाली’ के मंचन ने दर्शकों को आकर्षित किया। जानिए मेले की व्यवस्थाओं और आयोजनों की पूरी जानकारी।
तस्वीर में उदयपुर जिले के मेनार स्थित हिरोला की छापर मेला मैदान में धनतेरस और दीपावली के अवसर पर सजे मेले और झूलों का रात का दृश्य दिखाई दे रहा है।
उदयपुर जिले के शौर्य नगरी मेनार में आयोजित 28वें श्री अम्बामाता आमजन एवं पशुमेले ने चौथे दिन रफ्तार पकड़ ली। हिरोला की छापर मेला मैदान में चल रहे नौ दिवसीय मेले में धनतेरस और दीपावली पर्व को लेकर खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी। दिनभर बाजार में खरीदारी की चहल-पहल रही, वहीं रात को पारंपरिक लोकनाट्य ‘जगदेव कंकाली’ के मंचन ने सांस्कृतिक संध्या को खास बना दिया।
पर्व की खरीदारी को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। मनिहारी की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ लगी रही। मिठाई, वस्त्र, खिलौने और चाट-पकोड़ी की दुकानों पर भी दिनभर ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए डोलर, चकरी, मौत का कुआं, ड्रेगन झूला, मिकी माउस और टॉय ट्रेन आकर्षण का केंद्र रहे। मेले में खरीदारी के साथ मनोरंजन और ग्रामीण मेल-मिलाप का माहौल देखने को मिला।
पशु बाजार में 100 से अधिक पशुओं की आवक
मेले में पशु व्यापार भी धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है। खूंटा पर्ची प्रभारी नारायणलाल दियावत के अनुसार, अब तक मेले में 100 से अधिक पशु बिक्री के लिए पहुंच चुके हैं। बुधवार और गुरुवार को पशुपालक एवं ग्रामीण पशुओं की नस्ल, कीमत और गुणवत्ता के आधार पर मोलभाव करते नजर आए। आगामी दिनों में पशु व्यापार में और तेजी आने की उम्मीद है।
‘जगदेव कंकाली’ के मंचन ने दर्शकों को किया भावविभोर
वार्ड पंच कविता-लोकेश पुन्दड़ोत एवं कैलाशी-हीरालाल सुथार ने बताया कि मेले में मनोरंजन के साथ पारंपरिक लोककला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रमों का सिलसिला 8 नवंबर तक जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि रात्रिकालीन सांस्कृतिक आयोजन में लोकसंस्कृति और पारंपरिक कला का संगम देखने को मिला। रघुकुल रामायण मंडल, साकरोदा ग्रुप के कलाकारों ने पारंपरिक लोकनाट्य शैली में प्रसिद्ध प्रस्तुति ‘जगदेव कंकाली’ का प्रभावशाली मंचन किया। कलाकारों के सशक्त अभिनय, दमदार संवाद अदायगी और मंचीय प्रस्तुति ने लोकनाट्य परंपरा की झलक पेश की।
मंच पर कलाकारों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और अभिनय ने दर्शकों को देर रात तक कार्यक्रम से जोड़े रखा। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
सीसीटीवी निगरानी में मेला, 24 घंटे मुस्तैद सुरक्षा टीमें
सरपंच सुमित्रा रमेशचंद्र सांगावत ने बताया कि ग्राम पंचायत की ओर से मेलार्थियों और व्यापारियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पेयजल, बिजली, शौचालय, पार्किंग और पशु चिकित्सा की व्यवस्थाएं की गई हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे मेला परिसर को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया है। पुलिस एवं पशुपालन विभाग की टीमें सुरक्षा, पशु चिकित्सा और टीकाकरण सेवाओं के लिए 24 घंटे मुस्तैद हैं।
स्वच्छता व्यवस्था पर जोर, पेयजल और बिजली की सुविधा निःशुल्क
ग्राम विकास अधिकारी रामदीन मीणा, प्रभुदयाल यादव और लिपिक स्वरुपसिंह ने बताया कि मेले में स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है। परिसर के विभिन्न स्थानों पर कचरा पात्र रखवाए गए हैं। व्यापारियों को अपनी दुकानों और आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्राम पंचायत की ओर से मेले में आने वाले व्यापारियों और आमजन को पेयजल एवं विद्युत सुविधा निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। इस तरह मेले में खरीदारी, पशु व्यापार, सांस्कृतिक आयोजनों और व्यवस्थाओं के बीच नौ दिवसीय आयोजन की रौनक लगातार बढ़ रही है।