श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन: जगन्नाथ पुरी से शुरू होगी यात्रा
महंत नरेश पुरी महाराज के सानिध्य में 5000 किमी की यात्रा मथुरा पहुंचेगी, सर्व ब्राह्मण महासभा के प्रदेश मंत्री सुनील चौबीसा करेंगे प्रतिनिधित्व।
तस्वीर में कानोड़ के बाजार में खड़े लोग और भगवा माला पहने प्रतिनिधि दिख रहे हैं।
कानोड़। श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के चतुर्थ चरण के तहत श्री कृष्ण यात्रा 30 सितंबर से प्रारंभ होकर 10 अक्टूबर तक जगन्नाथ पुरी से मथुरा पहुंचेगी। यात्रा के दौरान जगन्नाथ पुरी से मथुरा तक कृष्ण नाम की गूंज सुनाई देगी। यात्रा मेहंदीपुर बालाजी के अध्यक्ष महंत नरेश पुरी महाराज के सानिध्य और संयुक्त भारतीय धर्म संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य राजेश्वर महाराज के कुशल नेतृत्व में निकाली जाएगी।
यात्रा के दौरान कैलाश परवाल द्वारा रचित श्री कृष्णम महाकाव्य का पाठ भी किया जाएगा। अत्रिश ने बताया कि श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष डॉ. महेंद्र प्रताप सिंह मथुरा से कई प्रकार की गतिविधियों के साथ कोर्ट में प्रामाणिक तौर-तरीके से 16 याचिकाओं के साथ मुकदमों की पैरवी कर रहे हैं।
इस यात्रा में सर्व ब्राह्मण महासभा के प्रदेश मंत्री सुनील चौबीसा अत्रिश मेवाड़ से प्रतिनिधित्व करेंगे। 28 सदस्यों का दल रथ के साथ चलेगा। अत्रिश ने बताया कि प्रथम यात्रा द्वारिकापुरी से मथुरा, द्वितीय यात्रा बद्रीनारायण से मथुरा और तृतीय यात्रा रामेश्वरम से मथुरा तक निकाली गई थी। चतुर्थ यात्रा का यह प्रस्थान है, जो लगभग 5000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी।
इसी क्रम में आज नगर के प्रबुद्ध जन, समाजसेवी, भक्तजनों और युवाओं की उपस्थिति में हालवेरा महादेव मंदिर में जलाभिषेक किया गया। सभी भक्तों ने मथुरा में श्री कृष्ण मंदिर शीघ्र बने, ऐसी प्रार्थना भोलेनाथ से कर संकल्प लिया। शिवगंज बाजार में सभी व्यापारियों ने भी मिलकर प्रार्थना की।
इस अवसर पर श्री शिव कुमार सोनी, प्रेम शंकर जोशी, भागीरथ प्रजापत, हेमन्त सोनी, चेतन सोनी, अशोक सोनी, कैलाश जी छीपा, मदन चौबीसा, भंवर लाल चौधरी, अश्विन व्यास, महावीर दक, पिंटू तेली, लाला जैन और हेमन्त सोनी उपस्थित रहे। प्रेमशंकर जोशी ने कृष्णमय वातावरण बनाते हुए गीत प्रस्तुत कर कीर्तन करवाया।
तत्पश्चात सुनील चौबीसा अत्रिश ने जन्मभूमि मुक्ति हेतु जनजागरण अभियान में हिस्सा लेने और आने वाले समय में जरूरत पड़ने पर संत समाज के आह्वान पर कारसेवा के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने 1869 में ढाई एकड़ जमीन पर कब्जा कर मस्जिद के निर्माण के संबंध में अपने संबोधन में आतातायियों और लुटेरों द्वारा लूटे जाने की बात कहते हुए उस कलंकित स्थान को हिन्दू समाज के हाथों से मिटाने की बात कही। कार्यक्रम के दौरान जयघोष किया गया—“कृष्ण लला हम आयेंगे, मन्दिर भव्य बनायेंगे।”