गुरु कृपा से ही जीवन में परमानंद और सद्गति संभव: मेवाड़ प्रवर्तक कोमल मुनि
खेरोदा के जैन स्थानक भवन में मेवाड़ प्रवर्तक कोमल मुनि म.सा. ने गुरु महिमा पर प्रवचन दिया। उन्होंने गुरु कृपा को आत्मिक पोषण, शांति, परमानंद और जीवन की सार्थक गति का आधार बताया।
तस्वीर में खेरोदा के जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा के दौरान मंच पर बैठे मेवाड़ प्रवर्तक कोमल मुनि म.सा. और अन्य संत नजर आ रहे हैं.
खेरोदा, 28 सितंबर। खेरोदा कस्बे के जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मेवाड़ प्रवर्तक पूज्य कोमल मुनि म.सा. ने गुरु महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु की छत्रछाया में ही आत्मा का वास्तविक पोषण होता है और उनके बताए मार्ग पर चलकर मानव जीवन आलोकित बनता है। गुरु के सान्निध्य से मिलने वाला आंतरिक आनंद ही साधक को परमानंद की अनुभूति कराता है।
मुनिश्री ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां डांवाडोल होने पर गुरु की कृपा सही दिशा देती है और भवसागर से पार उतारकर जीवन को सार्थक गति प्रदान करती है। गुरु ही साधक की सच्ची मंजिल और सन्मार्ग दिखाने वाली दिव्य शक्ति हैं। गुरु के बिना कोई भी पथ सुरक्षित और सुगम नहीं हो सकता। वे जीवन के आधार और सच्चे पालनहार हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य गुरु चरणों की शरण में रहता है, तब तक उसके जीवन में सच्चा सुकून, शांति और सुख का प्रवाह बना रहता है। गुरु कृपा से समस्त दुखों का शमन होता है। इसलिए साधक का रोम-रोम और प्राण-प्राण गुरु चरणों में समर्पित होना चाहिए, क्योंकि गुरु के उपकारों के समक्ष हमारा स्वयं का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है।
सभा में अध्ययनशील, सेवारत्न हर्षित मुनि ने कहा कि सौभाग्य गुरु जैसे युगदृष्टा महापुरुषों का धरा पर अवतरण विरले ही होता है। ऐसे संतों का महाप्रयाण न केवल समाज, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के लिए अपूरणीय क्षति और गहरा आघात होता है। उन्होंने कहा कि हमारे जीवन पर गुरु भगवंतों के इतने अनंत उपकार हैं, जिन्हें सात जन्मों में भी नहीं चुकाया जा सकता। उनके उपकारों के प्रति कृतज्ञ रहते हुए उनके बताए आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची गुरुभक्ति है।
इस दौरान चातुर्मास संयोजक अरविंद बड़ाला, वर्द्धमान जैन श्रावक संघ अध्यक्ष सुनील कूकड़ा, मंत्री मुकेश डांगी आदि ने बाहर से आए अतिथियों का स्वागत किया।