खैरवाड़ा के प्राचीन दुर्ग स्थित शीतला माता मंदिर में सप्तमी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
खैरवाड़ा के प्राचीन दुर्ग स्थित श्री शीतला माता मंदिर में शीतला सप्तमी पर सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही। महिलाओं ने विशेष रूप से पूजा-अर्चना की और माता को बासी भोजन व सोलह श्रृंगार सामग्री अर्पित की।
तस्वीर में शक्तिपीठ के महंत भारत भूषण महाराज खैरवाड़ा के मंदिर में माता शीतला की मूर्ति के समक्ष भोग की थाली पकड़े हुए नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।
खैरवाड़ा के प्राचीन दुर्ग पर स्थित श्री शीतला माता मंदिर में शीतला सप्तमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। महिलाओं की विशेष रूप से बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
शक्तिपीठ के महंत भारत भूषण ने बताया कि शीतला सप्तमी का दिन मां शीतला की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां शीतला को चेचक एवं त्वचा संबंधी रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि माता शीतला देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि एवं खुशहाली बनी रहती है।
शीतला सप्तमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने माता को जल, कुमकुम, अक्षत, रोली, हल्दी, लाल पुष्प, दीपक, बासी भोजन और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित की। श्रद्धालुओं ने माता की आरती और कीर्तन में भाग लिया। परमेश्वरी देवी के जयकारों से मंदिर परिसर गूंज उठा। इसके साथ ही मंदिर परिसर में स्थित बरगद के पेड़ की भी विधि-विधान से पूजा की गई।
महंत भारत भूषण महाराज ने बताया कि शीतला सप्तमी के अवसर पर शीतल एवं सात्विक भोजन ग्रहण करने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार इस पर्व के बाद बासी भोजन का सेवन नहीं किया जाना चाहिए। पूजन के दौरान शक्तिपीठ के संरक्षक के सानिध्य में पूजा-विधि के सभी उपक्रम संपन्न कराए गए।
शीतला सप्तमी के पूरे दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना-जाना बना रहा। पूजा-अर्चना, आरती, कीर्तन और जयकारों के बीच पर्व धार्मिक आस्था और परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुआ।