पुष्कर की रत्नागिरी पहाड़ी पर स्थित सावित्री माता मंदिर में जगत पिता ब्रह्मा जी की पहली धर्मपत्नी सावित्री माता का दो दिवसीय सालाना मेला शनिवार को सम्पन्न हुआ। मेले के दौरान अखंड सुहाग की दीर्घायु की कामना को लेकर विवाहित महिलाओं की मंदिर में दिनभर भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं की आस्था के साथ पुलिस और प्रशासन की व्यवस्थाएं भी पूरे समय सक्रिय रहीं।

शनिवार की अल सुबह मंगला आरती के साथ ही सुहागिन महिलाओं का सावित्री माता की पूजा के लिए तांता लगना शुरू हो गया। पूजन का सिलसिला देर शाम तक चला। महिलाओं ने मां सावित्री का पूजन कर चुनरी, बिंदिया, चूड़ा, मेहंदी, सिंदूर समेत श्रृंगार की 16 वस्तुओं का सुहाग बीड़ा माता रानी के चरणों में भेंट किया और अपने पति के दीर्घायु होने की कामना की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने जगत पिता ब्रह्माजी के दर्शन किए।

शाम को सावित्री पहाड़ी की तहलटी पर जन सैलाब उमड़ गया। मेले में पहुंचे लोगों ने चाट-पकोड़ी और हवाई झूले का जमकर आनंद लिया। सावित्री माता मंदिर के पुजारी कमल व कैलाश मिश्र ने मेला शांतिपूर्वक सम्पन्न होने पर उपखंड प्रशासन, पुलिस, नगर पालिका, डिस्कॉम व जलदाय विभाग तथा मेले के दौरान प्रत्यक्ष व अपरोक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी धार्मिक व सामाजिक संगठनों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

इससे पूर्व शुक्रवार की रात्रि को मंदिर में जागरण हुआ। इसमें पुष्कर के गायकों ने जगत जननी मां सावित्री समेत भगवान के विभिन्न भजनों की प्रस्तुति दी।

सालाना मेले में बड़े बुजुर्गों के लिए रोप-वे वरदान बना। रोप-वे संचालित होने से श्रद्धालुओं को माता रानी के दर्शन आसानी से हो सके। मातारानी के दर्शन करने के बाद बड़े बुजुर्ग काफी खुश नजर आए। उन्होंने बताया कि हमारी इच्छा थी कि मातारानी के दर्शन हों, रोप-वे संचालित होने से अब श्रद्धालुओं को दर्शन करने में काफी आसानी हो रही है।

दो दिवसीय मेले के दौरान पुलिस व प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। नगर परिषद की ओर से सावित्री पहाड़ी की तहलटी पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया। मेले में बिछड़े श्रद्धालुओं को वापस परिवार से मिलाने में कंट्रोल रूम काफी मददगार साबित हुआ। महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से अतिरिक्त महिला जाप्ता तैनात किया गया। इसके अलावा पानी और बिजली की भी माकुल व्यवस्था की गई।

चिकित्सा विभाग की ओर से अस्थायी डिस्पेंसरी लगाई गई, जहां जरूरतमंदों का प्राथमिक उपचार किया गया। इस तरह सावित्री माता का दो दिवसीय सालाना मेला श्रद्धालुओं की आस्था, धार्मिक आयोजन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच शांतिपूर्वक सम्पन्न हुआ।


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