डूंगरपुर में मोड़ कलाल समाज का सामाजिक सुधार खुला अधिवेशन आयोजित
विवाह में फिजूलखर्ची रोकने, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी पर मंथन हुआ।
तस्वीर में ऑडिटोरियम में कुर्सियों पर बैठे समाज के लोग कार्यक्रम में भाग लेते हुए दिख रहे हैं।
डूंगरपुर, 20 सितंबर। मोड़ (मेवाड़ा) कलाल समाज सेवा संस्थान (11 इकाई), डूंगरपुर की ओर से सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, युवा सहभागिता, संगठनात्मक एकता और सामाजिक सुधार को लेकर सामाजिक सुधार खुला अधिवेशन आयोजित किया गया। रविवार को राजमाता विजयाराजे सिंधिया ऑडिटोरियम, डूंगरपुर में हुए अधिवेशन में समाज की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की दिशा पर व्यापक मंथन हुआ।
मुख्य अतिथि भाजपा जिला अध्यक्ष, डूंगरपुर श्री अशोक पटेल (रणोली) के सान्निध्य में आयोजित अधिवेशन में समाज अध्यक्ष श्री राकेश कुमार पटेल (मोडासा), संरक्षक श्री नगीनलाल कलाल (बिलपण), सभाध्यक्ष श्री भरत कलाल (खेरवाड़ा), पूर्व संरक्षक श्री नारायणलाल ओडा एवं श्री रमणलाल नवाडेरा, पूर्व जनरल अध्यक्ष श्री मांगीलाल खेमारू, सह-संरक्षक श्री डी.के. खेड़ा, श्री गणपतलाल (अनसोल) एवं श्री चंदूलाल (बोरी), वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री प्रकाशचन्द्र (खेरवाड़ा), महिला उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा देवी एवं श्रीमती रंजना देवी, केंद्रीय उपाध्यक्ष श्री रामलाल (थाना), श्री गेबीलाल जी (बिलड़ी), श्री आर.टी. पटेल (चितरोड़ी), श्री आर.के. पटेल (देहगामड़ा) सहित सभी 11 इकाइयों के इकाई प्रमुख, वर्तमान एवं पूर्व पदाधिकारी, मातृशक्ति, युवा तथा बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की। इसके बाद बालिकाओं ने ईश-वंदना एवं प्रार्थना प्रस्तुत की। समाज अध्यक्ष श्री राकेश कुमार पटेल ने मुख्य अतिथि श्री अशोक पटेल का पगड़ी एवं माला पहनाकर स्वागत-अभिनंदन किया। उन्होंने उपस्थित पदाधिकारियों एवं समाजबंधुओं का भी स्वागत किया।
मुख्य अतिथि श्री अशोक पटेल ने अधिवेशन में मातृशक्ति की उल्लेखनीय उपस्थिति और सक्रिय सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि व्यक्ति समाज से बढ़कर नहीं होता, समाज सर्वोपरि होता है। उन्होंने सामाजिक एकता, सहभागिता एवं सामूहिक चिंतन को समाज की प्रगति के लिए आवश्यक बताया।
अधिवेशन में समाज की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की दिशा को लेकर खुले एवं सार्थक संवाद के माध्यम से सामाजिक नियमों एवं परंपराओं की समीक्षा की गई। विभिन्न इकाइयों से प्राप्त सुझावों पर विचार-विमर्श हुआ और सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई।
सामाजिक कुरीतियों एवं अनावश्यक परंपराओं के उन्मूलन की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर सहमति बनी। विवाह एवं अन्य सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च, दिखावे एवं प्रतिस्पर्धा पर नियंत्रण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने तथा बालिका शिक्षा एवं बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने के लिए सकारात्मक वातावरण बनाने पर बल दिया गया।
मातृशक्ति की सामाजिक एवं संगठनात्मक निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। युवा शक्ति को संगठन से जोड़कर नेतृत्व एवं सामाजिक गतिविधियों में अधिक जिम्मेदारी देने पर सहमति व्यक्त की गई। समाज की सभी 11 इकाइयों को अधिक सक्रिय, मजबूत एवं आपसी समन्वय के साथ कार्यशील बनाने पर भी जोर दिया गया।
समाज की उपयोगी एवं सकारात्मक परंपराओं को संरक्षित रखते हुए समय एवं परिस्थितियों के अनुरूप सामाजिक नियमों में आवश्यक संशोधन करने पर सहमति बनी। सामाजिक निर्णयों एवं संस्थागत कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही एवं सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए शिक्षा, संस्कार, सामाजिक एकता एवं आर्थिक रूप से संतुलित सामाजिक व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कार्ययोजना तैयार करने पर विचार किया गया। सामाजिक सुधार से जुड़े निर्णयों को केवल कागज तक सीमित न रखते हुए समाजजनों के व्यवहार एवं सामाजिक जीवन में प्रभावी रूप से लागू करने का सामूहिक संकल्प भी लिया गया।
संस्थान के महामंत्री डॉ. मोहनलाल कलाल ने कहा कि समाज सुधार केवल नियम बनाने से संभव नहीं है, बल्कि प्रत्येक समाजजन की सहभागिता और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आवश्यक है। संस्थान के सचिव श्री कल्पेश कुमार कलाल ने कहा कि यह अधिवेशन समाज के लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नई सोच, नई दिशा और सामूहिक संकल्प का महत्वपूर्ण पड़ाव है।
अधिवेशन में समाज को अधिक सशक्त, शिक्षित, संस्कारित, संगठित एवं प्रगतिशील बनाने तथा आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम की भोजन एवं पेयजल व्यवस्था में श्री निलेश जी बिलड़ी एवं युवा साथियों का विशेष सहयोग रहा। पंजीयन एवं विचार-संकलन में श्री छगन जी, श्री विजय जी, श्री जसवंत जी एवं श्री गजेंद्र जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के महामंत्री डॉ. मोहनलाल कलाल एवं सचिव श्री कल्पेश कुमार कलाल ने किया।