तस्वीर में खेरवाड़ा में आयोजित कलाल समाज के सामाजिक सुधार अधिवेशन के दौरान मंच पर बैठे हुए अतिथि नजर आ रहे हैं।   

खेरवाड़ा के मोड़ (मेवाड़ा) में कलाल समाज सेवा संस्थान (11 इकाई), डूंगरपुर के तत्वावधान में सामाजिक सुधार खुला अधिवेशन आयोजित किया गया। अधिवेशन में सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन, शिक्षा को बढ़ावा देने, महिला सशक्तीकरण, युवा सहभागिता, संगठनात्मक एकता और बदलते समय के अनुरूप सामाजिक नियमों में आवश्यक बदलाव को लेकर व्यापक मंथन हुआ। 11 इकाइयों के पदाधिकारियों, मातृशक्ति, युवाओं और बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने सामाजिक सुधारों को व्यवहार में लागू करने का सामूहिक संकल्प लिया।

ऑडिटोरियम में आयोजित अधिवेशन में मुख्य अतिथि भाजपा जिला अध्यक्ष डूंगरपुर अशोक पटेल के सान्निध्य में समाज अध्यक्ष राकेश कुमार पटेल, संरक्षक नगीनलाल कलाल, सभाध्यक्ष भरत कलाल, पूर्व पदाधिकारी, संरक्षक, 11 इकाइयों के इकाई प्रमुख, मातृशक्ति, युवा एवं बड़ी संख्या में समाजबंधु मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद बालिकाओं ने ईश-वंदना एवं प्रार्थना प्रस्तुत की।

मुख्य अतिथि अशोक पटेल ने मातृशक्ति की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि व्यक्ति से समाज सर्वोपरि है। उन्होंने सामाजिक एकता, सहभागिता और सामूहिक चिंतन को समाज की प्रगति के लिए आवश्यक बताया।

अधिवेशन में सामाजिक नियमों एवं परंपराओं की समीक्षा की गई। विभिन्न इकाइयों से प्राप्त सुझावों पर व्यापक चर्चा करते हुए विवाह एवं अन्य सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च, दिखावे और प्रतिस्पर्धा पर नियंत्रण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साथ ही सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा उपयोगी परंपराओं के संरक्षण को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।

समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने, बालिका शिक्षा और बालिका जन्म के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने तथा मातृशक्ति को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने पर सहमति बनी। युवाओं को संगठन और सामाजिक गतिविधियों में नेतृत्व की जिम्मेदारी देने के साथ सभी 11 इकाइयों को सक्रिय एवं मजबूत बनाने तथा आपसी समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

अधिवेशन में सामाजिक निर्णयों एवं संस्थागत कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामूहिक सहभागिता बढ़ाने पर चर्चा हुई। बदलते समय के अनुरूप सामाजिक नियमों में आवश्यक संशोधन करने तथा शिक्षा, संस्कार, सामाजिक एकता और आर्थिक रूप से संतुलित सामाजिक व्यवस्था के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर भी विचार किया गया।

संस्थान के महामंत्री डॉ. मोहनलाल कलाल ने कहा कि समाज सुधार केवल नियम बनाने से संभव नहीं है, बल्कि प्रत्येक समाजजन की सहभागिता और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव जरूरी है। सचिव कल्पेश कुमार कलाल ने अधिवेशन को समाज के लिए नई सोच, नई दिशा और सामूहिक संकल्प का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।

अधिवेशन में सामाजिक सुधार से जुड़े निर्णयों को व्यवहार में प्रभावी रूप से लागू करने तथा समाज को अधिक सशक्त, शिक्षित, संस्कारित, संगठित एवं प्रगतिशील बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।

कार्यक्रम की भोजन एवं पेयजल व्यवस्था में निलेश बिलड़ी एवं युवा साथियों का सहयोग रहा। पंजीयन एवं विचार-संकलन में छगन, विजय, जसवंत एवं गजेंद्र ने भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन महामंत्री डॉ. मोहनलाल कलाल एवं सचिव कल्पेश कुमार कलाल ने किया।

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