पुष्कर में भाजपा की हैट्रिक, 25 में 19 सीटों पर कब्जा; कांग्रेस सिर्फ 4 वार्डों तक सिमटी
पुष्कर निकाय चुनाव 2026 में भाजपा ने 25 में से 19 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार बोर्ड बनाने का रास्ता साफ किया, कांग्रेस को 4 सीटें मिलीं।
पुष्कर नगर परिषद के निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भाजपा ने एक बार फिर स्पष्ट बढ़त हासिल करते हुए 25 में से 19 वार्डों पर जीत दर्ज की है। कांग्रेस को 4 सीटें मिलीं, जबकि 2 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल की। इस परिणाम के साथ पुष्कर नगर परिषद में भाजपा का लगातार तीसरी बार बोर्ड बनने का रास्ता साफ हो गया है।
भाजपा के 19 पार्षदों के साथ नगर परिषद में पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है। चुनाव परिणामों ने पुष्कर की स्थानीय राजनीति में भाजपा के प्रभाव और संगठनात्मक पकड़ को एक बार फिर सामने ला दिया है। वहीं, कांग्रेस के लिए चार सीटों तक सिमट जाना बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
पुष्कर की 25 सदस्यीय नगर परिषद में भाजपा ने बहुमत के आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया है। कांग्रेस के खाते में चार सीटें आईं, जबकि दो वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। इस तरह बोर्ड गठन को लेकर तस्वीर लगभग पूरी तरह स्पष्ट हो गई है।
निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी दो वार्डों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। वार्ड 11 से निर्दलीय प्रियंका पाराशर पत्नी रवि बाबा ने भाजपा प्रत्याशी नीलम पाराशर को 143 मतों से हराया। प्रियंका पाराशर को 439 और नीलम पाराशर को 296 मत मिले। वहीं वार्ड 13 से निर्दलीय प्रत्याशी हिमांशु कुमावत ने 348 मत हासिल कर निर्दलीय उम्मीदवार लक्ष्मीनारायण को 232 मतों से हराया। लक्ष्मीनारायण को 116 मत मिले। इस वार्ड में भाजपा के जयनारायण दगदी तीसरे नंबर पर रहे।
भाजपा की जीत में कई मुकाबले बेहद करीबी रहे। वार्ड 1 में भाजपा की तनुजा ने 136 मत हासिल कर निर्दलीय इमरती को 131 मतों के मुकाबले सिर्फ 5 वोट से हराया। वार्ड 20 में भाजपा की नीलम ने 267 मत लेकर कांग्रेस की उमा दागदी को 265 मतों के मुकाबले केवल 2 वोट से शिकस्त दी। यह भाजपा की सबसे कम मतों से हुई जीत रही।
दूसरी ओर, सबसे बड़ी जीत वार्ड 22 में भाजपा के मुकेश कुमावत की रही। उन्होंने 542 मत हासिल किए, जबकि कांग्रेस के जितेंद्र गहलोत को 38 मत मिले। मुकेश कुमावत ने 504 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। विष्णु सेन और मुकेश कुमावत ने जीत की हैट्रिक लगाई।
वार्ड 2 में भाजपा के राजेंद्र बाकोलिया 489 मतों के साथ विजयी रहे। कांग्रेस के अनिल को 231 मत मिले और जीत का अंतर 258 वोट रहा। वार्ड 3 में भाजपा के नरेंद्र ने 435 मत हासिल किए और कांग्रेस के मधुसूदन पाराशर को 280 मतों के मुकाबले 155 मतों से हराया।
वार्ड 4 में भाजपा के शरपत सिंह रावत ने 728 मत लेकर कांग्रेस के भागचंद को 552 मतों के मुकाबले 176 मतों से हराया। वार्ड 5 में भाजपा की वंदना पाराशर को 228 और कांग्रेस की सुनीता को 173 मत मिले। वंदना पाराशर 55 मतों से विजयी रहीं।
वार्ड 6 में भाजपा के भुवनेश पाठक ने 562 मत हासिल किए, जबकि कांग्रेस के मुरलीधर को 61 मत मिले। भुवनेश पाठक ने 501 मतों से जीत दर्ज की। वार्ड 7 में भाजपा की सुशीला 428 मत लेकर विजयी हुईं। कांग्रेस की श्वेता पाराशर को 284 मत मिले और जीत का अंतर 144 वोट रहा।
वार्ड 8 में भाजपा के अनुज पाराशर ‘बंटी’ को 202 मत और कांग्रेस के वैद्यनाथ को 186 मत मिले। अनुज पाराशर ‘बंटी’ ने 16 मतों से जीत दर्ज की। वार्ड 9 में भाजपा की लक्ष्मी पाराशर को 316 और कांग्रेस की कंचन देवी को 133 मत मिले। जीत का अंतर 183 वोट रहा।
वार्ड 10 में भाजपा के धर्मेंद्र ने 426 मत हासिल कर कांग्रेस के प्रेम प्रकाश को 224 मतों के मुकाबले 202 मतों से हराया। वार्ड 12 में भाजपा के वेद प्रकाश को 406 और कांग्रेस के विजय सिंह को 295 मत मिले। वेद प्रकाश 111 मतों से विजयी रहे।
वार्ड 14 में भाजपा के पुष्कर नारायण भाटी ने 311 मत लेकर कांग्रेस के निर्मल को 93 मतों के मुकाबले 218 मतों से हराया। वार्ड 15 में कांग्रेस के ओमप्रकाश डोल्या ने 357 मत हासिल कर भाजपा के शिव स्वरूप महर्षि को 195 मतों के मुकाबले 162 मतों से हराया।
वार्ड 16 में कांग्रेस की सुनीता नायक 251 मतों के साथ विजयी रहीं। भाजपा की अमीषा को 118 मत मिले और जीत का अंतर 133 वोट रहा। वार्ड 17 में भाजपा की अंजलि रामावत ने 279 मत हासिल किए, जबकि कांग्रेस की कांता को 17 मत मिले। अंजलि रामावत 262 मतों से जीतीं।
वार्ड 18 में भाजपा की भगवती भाटी ने 384 मत हासिल किए और निर्दलीय मोनिका सैनी को 147 मतों के मुकाबले 237 मतों से हराया। वार्ड 19 में भाजपा के हरिशंकर चौहान को 407 और कांग्रेस के प्रशांत वर्मा को 382 मत मिले। हरिशंकर चौहान 25 मतों से विजयी रहे।
वार्ड 21 में भाजपा के विष्णु प्रसाद ने 278 मत हासिल कर कांग्रेस के आयुष गिरि गोस्वामी को 88 मतों के मुकाबले 190 मतों से हराया। वार्ड 23 में भाजपा के मोहित पाराशर को 270 और निर्दलीय कालूराम को 181 मत मिले। मोहित पाराशर 89 मतों से जीते।
वार्ड 24 में कांग्रेस के नारायण दायमा ने 347 मत हासिल कर भाजपा के मदन को 150 मतों के मुकाबले 197 मतों से हराया। वार्ड 25 में कांग्रेस के जय कुमार को 247 और निर्दलीय सुखराम को 142 मत मिले। जय कुमार ने 105 मतों से जीत दर्ज की।
भाजपा के पूर्व उपसभापति एवं पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष शिव स्वरूप महर्षि और जय नारायण दगदी अपनी प्रतिष्ठा नहीं बचा पाए। शिव स्वरूप महर्षि लगातार तीन बार पार्षद का चुनाव जीत चुके थे, जबकि जयनारायण दगदी लगातार चार बार चुनाव जीत चुके थे। इस बार दोनों को हार का सामना करना पड़ा। वार्ड 15 में शिव स्वरूप महर्षि को कांग्रेस के ओमप्रकाश डोल्या ने हराया, जबकि वार्ड 13 में भाजपा के जयनारायण दगदी तीसरे नंबर पर रहे।
भाजपा के आठ में से सात निवर्तमान पार्षद पुनः जीतकर नगर परिषद में पहुंचे हैं। भाजपा के रोहन बाकोलिया, वंदना पाराशर, लक्ष्मी पाराशर, धर्मेंद्र नागोरा, भगवती टांक, विष्णु सेन और मुकेश कुमावत को जनता ने एक बार फिर मौका दिया, जबकि जय नारायण दगदी इस बार चुनाव हार गए।
कांग्रेस के ओमप्रकाश डोलिया कांग्रेस के एकमात्र ऐसे पार्षद हैं, जो लगातार दूसरी बार चुनाव जीतकर नगर परिषद में पहुंचे हैं। वार्ड 15 से उन्होंने भाजपा के शिव स्वरूप महर्षि को 162 मतों से हराया।
चुनावी परिणाम सामने आने के बाद अब सबकी नजर नगर परिषद की सभापति की कुर्सी पर है। भाजपा की ओर से रोहन बाकोलिया को सभापति पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। भाजपा के पास 19 पार्षदों का मजबूत समर्थन होने के कारण सभापति पद पर भी पार्टी की स्थिति बेहद मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा संगठन और पार्टी नेतृत्व की रणनीति के बाद ही सामने आएगा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में रोहन बाकोलिया का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
पुष्कर नगर परिषद की राजनीति में भाजपा के लिए यह परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी लगातार तीसरी बार बोर्ड बनाने जा रही है। एक बार सत्ता, फिर दोबारा सत्ता और अब तीसरी बार सत्ता के साथ भाजपा ने पुष्कर में स्थानीय निकाय की राजनीति में लगातार हैट्रिक लगा दी है। यह जीत भाजपा के लिए केवल 19 पार्षदों की जीत नहीं है, बल्कि उस राजनीतिक पकड़ का संकेत भी है, जो पार्टी ने पुष्कर में लगातार मजबूत की है।
भाजपा की 19 सीटों के मुकाबले कांग्रेस चार सीटों तक सीमित रही और दो सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी हुए। सीटों का यह अंतर नगर परिषद की सत्ता के राजनीतिक संतुलन को एकतरफा करता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के सामने अब अपने स्थानीय संगठन, चुनावी रणनीति और कमजोर प्रदर्शन की समीक्षा की चुनौती है।
लगातार तीसरी बार बोर्ड बनने के बाद भाजपा के सामने अब इस जीत को विकास की कसौटी पर साबित करने की चुनौती होगी। पुष्कर धार्मिक और पर्यटन नगरी है। ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, सड़कें, पेयजल, रोशनी, अतिक्रमण, पर्यटन सुविधाएं और शहर के सौंदर्यीकरण जैसे मुद्दे नई परिषद के सामने बड़ी प्राथमिकताएं रहेंगी।
जनता ने भाजपा को स्पष्ट बहुमत दिया है। विपक्ष की संख्या भले ही कम है, लेकिन नई परिषद के कामकाज पर शहरवासियों की नजर रहेगी। 25 वार्डों के जनादेश में 19 सीटें भाजपा, 4 कांग्रेस और 2 निर्दलीयों के खाते में गई हैं। इस परिणाम के साथ पुष्कर नगर परिषद में भाजपा की लगातार तीसरी जीत और लगातार तीसरी बार बोर्ड बनाने की तस्वीर स्पष्ट हो गई है।