खेरोदा में श्रीमद्भागवत कथा: अनुज महाराज ने बताया जीवन जीने की वास्तविक कला
खेरोदा की श्रीमद्भागवत कथा में अनुज महाराज ने धन से अधिक परिवार, सत्कर्म और प्रभु भक्ति को आत्मिक शांति का आधार बताया।
तस्वीर में व्यासपीठ पर कथावाचक अनुज महाराज कथा का वाचन करते हुए नजर आ रहे हैं।
खेरोदा कस्बे के राजश्री वाटिका में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में कथावाचक अनुज महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन के वास्तविक उद्देश्य और आत्मिक शांति का संदेश दिया। 13-09-2026 को कथा के दौरान उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को सही दिशा देने के साथ जीवन जीने की वास्तविक कला सिखाती है।
कथा का शुभारंभ विधिवत गणेश वंदना और पूजन-अर्चन के साथ हुआ। इसके बाद पूरा पंडाल भक्ति रस में डूब गया। कथावाचक अनुज महाराज ने ‘धन कमाने में यूं ही जिंदगी हमने बेकार कर दी’ भजन प्रस्तुत कर सांसारिक मोह-माया पर प्रकाश डाला।
महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य जीवन केवल धनोपार्जन के लिए नहीं है। हर कार्य पैसे से संभव नहीं होता, बल्कि कुछ कार्यों के लिए मन की शुद्धि और अपनों के साथ की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि भौतिक धन-संपत्ति प्राप्त की जा सकती है, लेकिन आत्मिक शांति केवल सत्कर्मों और प्रभु भक्ति से ही मिलती है।
संतों की वाणी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर साथ रहते हैं और एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, वही संसार का सबसे बड़ा धन और परम सुख है। उन्होंने कहा कि एक समय के बाद संचित धन काम आना बंद हो जाता है।
कथा प्रसंग में मीराबाई के भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति हुई, जिस पर श्रद्धालु झूम उठे। इसके बाद कथावाचक ने बालकृष्ण लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कारागृह में हुआ, किंतु वे वहां रुके नहीं और सीधे गोकुल चले गए।
‘गोकुल’ की महिमा बताते हुए अनुज महाराज ने कहा कि जहां गायों का कुल और वास है, वही सच्चा गोकुल है। उन्होंने भगवान शिव द्वारा गोकुल पहुंचकर बालकृष्ण के दर्शन करने का रोचक प्रसंग भी सुनाया।
कथा के समापन पर मुख्य यजमान सहित उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान की भव्य आरती उतारी। इसके बाद सभी भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया।