मावली कोर्ट ने दुष्कर्म-ब्लैकमेलिंग के आरोपी को दी अग्रिम जमानत
अदालत ने केस डायरी के अवलोकन के बाद प्रथम दृष्टया मामला आपसी सहमति का मानते हुए अभियुक्त को शर्तों के साथ गिरफ्तारी से राहत दी।
मावली/उदयपुर। खैरोदा थाना क्षेत्र से जुड़े दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग के मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश, मावली (जिला उदयपुर) के पीठासीन अधिकारी युवराज सिंह गुर्जर ने प्रार्थी/अभियुक्त राजेश शर्मा पुत्र पन्नालाल, निवासी आरामपुरा, तहसील भीण्डर की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अभियुक्त की ओर से एडवोकेट भरत प्रजापत ने न्यायालय के समक्ष पुख्ता तर्क और कानूनी दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए पैरवी की।
खैरोदा थाने में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 150/2026 के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया था कि मई 2026 में केदारिया महादेव मेले के दौरान उसकी पहचान राजेश से हुई थी। आरोप है कि अभियुक्त ने बहला-फुसलाकर उसका मोबाइल नंबर लिया और 23 मई 2026 को उसे घर में अकेली पाकर उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि चाकू की नोक पर उसके अश्लील फोटो-वीडियो बनाए गए और ब्लैकमेल करते हुए 2,00,000 रुपये की मांग की गई।
सुनवाई के दौरान अभियुक्त के अधिवक्ता भरत प्रजापत ने न्यायालय को बताया कि अभियुक्त पूर्णतः निर्दोष है और उसे झूठा व दुर्भावनावश इस प्रकरण में फंसाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि अभियुक्त और पीड़िता के बीच प्रेम संबंधों का खुलासा होने के बाद पीड़िता पर उसके पति व अन्य रिश्तेदारों ने दबाव डालकर मुकदमा दर्ज करवाया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पीड़िता का गर्भपात नहीं हुआ और न ही अभियुक्त ने उसके अश्लील फोटो और वीडियो बनाए हैं।
अधिवक्ता भरत प्रजापत ने न्यायालय के समक्ष यह भी तर्क रखा कि पीड़िता और अभियुक्त के बीच संबंध आपसी सहमति से थे। उनके अनुसार, इन संबंधों का खुलासा होने के डर और परिजनों के दबाव के कारण पीड़िता ने राजेश को सबक सिखाने तथा मोटी रकम ऐंठने के उद्देश्य से झूठा प्रकरण दर्ज कराया है। बचाव पक्ष ने कहा कि पीड़िता और अभियुक्त लंबे समय से प्रेम प्रसंग में लिप्त थे और सोशल मीडिया पर दोनों के बीच बातचीत के मैसेज भी मौजूद हैं। अपने तर्कों के समर्थन में अधिवक्ता भरत प्रजापत ने सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के कई महत्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए।
लोक अभियोजक ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। दोनों पक्षों के तर्क सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने माना कि मामले के तथ्य प्रथम दृष्टया आपसी सहमति से जुड़े प्रतीत होते हैं।
इसके बाद न्यायालय ने अभियुक्त राजेश शर्मा को ₹50,000 के निजी मुचलके तथा इतनी ही राशि के दो अन्य जमानतों पर अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायालय ने अभियुक्त को अनुसंधान में पूरा सहयोग करने और न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने जैसी सख्त शर्तें भी लगाई हैं। इस आदेश के साथ खैरोदा थाना क्षेत्र से जुड़े इस चर्चित मामले में आरोपी को जांच के दौरान गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।