तस्वीर में खेरोदा की राजश्री वाटिका में बने मंच पर कथावाचक अनुज महाराज श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हुए नजर आ रहे हैं।

खेरोदा। कस्बे के राजश्री वाटिका में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शाम को आयोजित कथा सत्र में कथावाचक अनुज महाराज ने भगवान के वामन अवतार, दानवीर राजा बलि के प्रसंग और भक्त नरसिंह के मायरे की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। प्रसंगों को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए।

अनुज महाराज ने राजा बलि के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि अहंकार को समाप्त करने के लिए भगवान ने वामन रूप धारण किया था। भगवान वामन ने दानवीर राजा बलि से दान स्वरूप केवल तीन पग भूमि मांगी। बलि की स्वीकृति के बाद भगवान ने विराट रूप धारण कर पहले पग में पृथ्वी लोक और दूसरे पग में स्वर्ग लोक को नाप लिया।



तीसरा पग रखने के लिए जब कोई स्थान नहीं बचा, तब राजा बलि ने पूर्ण भक्ति और समर्पण के साथ अपना मस्तक भगवान के चरणों में समर्पित कर दिया। कथा में इस प्रसंग के माध्यम से भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण का वर्णन किया गया।

इसके साथ ही कथावाचक ने भक्त नरसिंह के मायरे का प्रसंग भी विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि जब भक्त सच्चे हृदय से ईश्वर को पुकारता है, तो भगवान अपने भक्त की लाज रखने स्वयं दौड़े चले आते हैं।

कथा के दौरान जैसे ही ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ और ‘जय यशोदा जय नंदलाल’ जैसे भक्ति भजनों की धुन बजी, पूरा पांडाल भक्ति रस में डूब गया। श्रोतागण अपनी जगह खड़े होकर झूमने और नाचने लगे।

संगीतीय कथा में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने देर शाम तक कथा का श्रवण कर धर्मलाभ उठाया। चौथे दिन वामन अवतार, राजा बलि और भक्त नरसिंह के प्रसंगों के साथ कथा का आयोजन भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ।

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