गणगौर घाट पर गूंजी दिवेर विजय की गाथा, नुक्कड़ नाटक में दिखा मेवाड़ का शौर्य
उदयपुर के गणगौर घाट पर दिवेर युद्ध पर आधारित नुक्कड़ नाटक हुआ, वहीं संभाग स्तरीय भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने शौर्य गाथा रखी।
तस्वीर में उदयपुर के गणगौर घाट पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करतीं युवतियां दिख रही हैं।
पिछोला झील के प्रसिद्ध गणगौर घाट पर गुरुवार शाम मेवाड़-मुगल संघर्ष के निर्णायक मोड़ माने जाने वाले दिवेर युद्ध की गाथा जीवंत हो उठी। प्रताप गौरव केन्द्र 'राष्ट्रीय तीर्थ' के तत्वावधान में दिवेर युद्ध पर आधारित नुक्कड़ नाटक का पहला सार्वजनिक मंचन किया गया। युवा कलाकारों की शौर्यपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को आकर्षित किया और आयोजन स्थल पर देशभक्ति तथा स्वाभिमान से जुड़े भावों का प्रभाव दिखाई दिया।
नाटक के दौरान जैसे ही युवा कलाकारों ने “जैसा कि होता आया है, अब वैसा ना होने देंगे, लाज बचाई थी जिसने, हम उनको ना खोने देंगे।” संवाद का शौर्यपूर्ण उच्चारण किया, आसपास मौजूद लोग नाटक की ओर खिंचे चले आए। नाटक का उद्देश्य भारतवर्ष के भुला दिए गए गौरवशाली इतिहास और शूरवीरों के शौर्य से लोगों को परिचित कराना रहा।
प्रस्तुति में महाराणा प्रताप द्वारा दिवेर चौकी पर किए गए ऐतिहासिक हमले, कुंवर अमर सिंह की वीरतापूर्ण भूमिका और मेवाड़ी वीरों के अदम्य साहस को सजीव रूप में प्रदर्शित किया गया। नाटक को वर्तमान समय की प्रासंगिकता से जोड़ते हुए शूरवीरों की गाथाओं को हमेशा याद रखने की प्रेरणा भी दी गई। इसका सफल मंचन मीरा गर्ल्स कॉलेज और विद्या भवन पॉलिटेक्निक कॉलेज के विद्यार्थियों ने किया।
अमित श्रीमाली और अमित व्यास के लेखन एवं निर्देशन में हुए मंचन में मीमांसा परसाई, रंजन कुमार साहनी, जलज भारद्वाज, मानवी ऑडिच्या, नीतू अहारी, अर्चना साहनी, अंजना सुथार, हंसा मीणा, निशा बंजारा, दर्शिका वैष्णव और नकुल पंड्या ने विभिन्न पात्रों की भूमिकाएं निभाईं।
दिवेर विजय महोत्सव 2026 के अंतर्गत राजस्थान के विभिन्न संभागों में भाषण प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने महाराणा प्रताप के रण-कौशल, प्रशासनिक कुशलता और दिवेर युद्ध की ऐतिहासिक महत्ता पर अपने विचार रखे। इस दौरान इतिहास से जुड़े भ्रामक तथ्यों पर प्रहार करते हुए वक्ताओं ने प्रताप की विजय को अकाट्य सत्य बताया।
उदयपुर के राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में संभागीय स्तरीय भाषण प्रतियोगिता आयोजित हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या प्रो. अंजना गौतम ने की। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के पूर्व समन्वयक विलास जानवे एवं सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के डिप्टी डायरेक्टर गौरीकान्त शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने कहा कि कुछ लोग महाराणा प्रताप की विजय के तथ्य को लेकर अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं कि यह विमर्श अब खड़ा किया जा रहा है, लेकिन संभवत: उन्होंने वरिष्ठ इतिहासकार ओझाजी को नहीं पढ़ा, जिन्होंने बरसों पहले ही महाराणा प्रताप की विजय प्रतिपादित की थी। उन्होंने कहा कि जिन्हें महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी जैसे महापुरुषों के स्मरण से घबराहट हो, वे ही महाराणा प्रताप की विजय को अनर्गल तथ्यों से चुनौती देते रहे हैं।
प्रतियोगिता में प्रथम स्थान राजकीय मीरा कन्या महाविद्यालय की जागृति जागेटिया ने प्राप्त किया। द्वितीय स्थान संयुक्त रूप से हिमांशु आसेरी (एसएमबी महाविद्यालय, नाथद्वारा) एवं स्पर्शी जैन (श्री गोविंद गुरु राजकीय महाविद्यालय, बाँसवाड़ा) का रहा।
इसी क्रम में ‘विजय योद्धा एवं कुशल प्रशासक के रूप में महाराणा प्रताप’ विषय पर बीकानेर के राजकीय डूंगर महाविद्यालय में भी संभाग स्तरीय भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के वरिष्ठ संकाय सदस्य प्रोफेसर नरेंद्र नाथ ने की, जबकि प्रोफेसर विक्रमजीत ने विशिष्ट अतिथि के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। मुख्य अतिथि दिवेर विजय महोत्सव 2026 के संयोजक रमन कुमार सूद रहे।
संपूर्ण कार्यक्रम का संयोजन प्रोफेसर सुखाराम ने किया। प्रतियोगिता में 11 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। यहां प्रथम स्थान राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर के निखिल चौधरी ने प्राप्त किया। द्वितीय स्थान राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर की संजू कंवर ने हासिल किया, जबकि तृतीय स्थान नेहरू मेमोरियल कॉलेज, हनुमानगढ़ के कृष ने प्राप्त किया।
राजस्थान के विभिन्न संभागों में आयोजित इन भाषण प्रतियोगिताओं के माध्यम से चयनित विजेता छात्र-छात्राएं अब आगामी राज्य स्तरीय भाषण प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी। गणगौर घाट पर दिवेर युद्ध पर आधारित नुक्कड़ नाटक और संभाग स्तरीय भाषण प्रतियोगिताओं के जरिए दिवेर विजय, महाराणा प्रताप के रण-कौशल और मेवाड़ी वीरों के शौर्य को केंद्र में रखकर कार्यक्रमों की श्रृंखला आगे बढ़ी।