खेरोदा रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्थाओं का अंबार, ट्रेन जाते ही छा जाता है अंधेरा
खेरोदा रेलवे स्टेशन पर पहचान बोर्ड और संकेतकों का अभाव है। ट्रेन जाते ही अंधेरा होने से यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
तस्वीर में खेरोदा रेलवे स्टेशन के बाहर का वीरान रास्ता और बुनियादी सुविधाओं का अभाव दिखाई दे रहा है।
खेरोदा रेलवे स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं और आवश्यक व्यवस्थाओं के अभाव से यात्रियों तथा ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन के बाहर पहचान बोर्ड और परिसर में जरूरी संकेतकों की अनुपस्थिति के साथ विद्युत व्यवस्था को लेकर भी समस्या सामने आई है।
स्टेशन के बाहर मुख्य मार्ग पर कोई दिशा-सूचक बोर्ड नहीं होने से बाहरी क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों, विशेषकर रात्रि के समय, को स्टेशन ढूंढने में परेशानी होती है। कई बार स्टेशन की पहचान नहीं हो पाने के कारण यात्री आगे निकल जाते हैं या असमंजस में भटकते रहते हैं।
स्टेशन की दूसरी प्रमुख समस्या विद्युत व्यवस्था से जुड़ी है। ग्रामीणों और नियमित यात्रियों का आरोप है कि जैसे ही ट्रेन स्टेशन से रवाना होती है, प्लेटफॉर्म की अधिकांश लाइटें बंद कर दी जाती हैं। इसके बाद पूरे परिसर में अचानक अंधेरा छा जाता है। इससे ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों में असुरक्षा का भय बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों की सक्रियता बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है।
ग्रामीणों का कहना है कि इन बुनियादी समस्याओं के संबंध में रेलवे के संबंधित अधिकारियों को कई बार मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन प्रशासन ने अब तक इस ओर कोई संज्ञान नहीं लिया है। रेलवे की इस उपेक्षापूर्ण कार्यशैली को लेकर स्थानीय निवासियों में रोष व्याप्त है।
क्षेत्रवासियों ने रेल प्रशासन के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि स्टेशन के बाहर मुख्य सड़क पर बड़ा पहचान बोर्ड लगाया जाए, परिसर में समुचित दिशा-सूचक संकेतक स्थापित किए जाएं और ट्रेन के जाने के बाद भी पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।