अयोध्या के रायगंज जैन मंदिर में गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ससंघ का वर्षायोग स्थापित

अयोध्या के रायगंज जैन मंदिर में गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ससंघ ने वर्षायोग स्थापित किया, चातुर्मास कार्यक्रमों की हुई घोषणा।

Update: 2026-08-01 14:10 GMT

तस्वीर में गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ अयोध्या के दिगम्बर जैन मंदिर में भक्तों से श्रीफल स्वीकार करते हुए नजर आ रही हैं।

शाश्वत तीर्थ अयोध्या स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर रायगंज में जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ ने वर्षायोग स्थापित किया। इस अवसर पर संघ में निवासरत 16 साध्वी माताजी एवं संघस्थ ब्रह्मचारिणी बहनों की उपस्थिति रही।

अयोध्या तीर्थ क्षेत्र समिति के मंत्री विजय कुमार जैन ने बताया कि जैन शास्त्रों के अनुसार वर्षाकाल में संतों को चार महीने तक एक ही स्थान पर रहकर अपनी चर्या का पालन करना होता है। यह अवधि आषाढ़ शुक्ला चतुर्दशी की रात्रि से कार्तिक कृष्णा अमावस्या तक निर्धारित रहती है।

गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने 28 जुलाई को मध्याह्न प्रवचन करते हुए कहा कि सन् 2026 का चातुर्मास काल शाश्वत तीर्थ अयोध्या के तीर्थंकर भगवंतों की जन्मभूमि पर उनका सम्पन्न होगा। इस संदर्भ में कमेटी की अध्यक्ष पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी, संघपति श्री अनिल जैन प्रीतविहार दिल्ली, श्री कैलाशचंद सर्राफ, आदीश जैन, श्री सुभाषचंद जैन लखनऊ, महामंत्री श्री अमरचंद जैन, कोषाध्यक्ष श्री रिषभ जैन एवं जितेन्द्र जैन (लल्ला) तहसील फतेहपुर, मंत्री श्री विजय कुमार जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, अतुल जैन, प्रमेन्द्र जैन, निधेश जैन टिकैतनगर सहित अवध प्रांत के भक्तों ने पूज्य माताजी को श्रीफल समर्पित कर विनयपूर्वक चातुर्मास स्थापना के लिए अनुरोध किया था।

वर्षायोग स्थापना सभा की अध्यक्षता श्री प्रमोद कुमार जैन संभाजीनगर महाराष्ट्र ने की। सम्पूर्ण चातुर्मास की व्यवस्थाओं का संचालन संघपति श्री अनिल कुमार के द्वारा किया जाएगा।

इस अवसर पर पूज्य ज्ञानमती माताजी को संयम के उपकरण पिच्छी प्रदान करने का सौभाग्य श्रीमती सरला, महावीर प्रसाद, दर्शना रविप्रकाश, पारस, मानसी, रिषभ जैन एवं सिद्धि जैन-निजामाबाद (तेलंगाना) को प्राप्त हुआ। वहीं पूज्य माताजी के चरण प्रक्षाल करने का सौभाग्य सौ. सपना जितेन्द्र जैन लुहाडिया एवं सौ. माधुरी विजय पापड़ीवाल ने प्राप्त किया।

चातुर्मास काल के दौरान दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत इन्द्रध्वज महामंडल विधान का आयोजन किया जाएगा। इसमें देश के विभिन्न अंचलों से भक्तगण शामिल होंगे। आयोजन में 50 मंडल बनाकर अर्घ्य समर्पित किए जाएंगे। भगवंतों की आराधना का यह कार्यक्रम 11 दिन तक भादों शुक्ला पंचमी से चतुर्दशी तक चलेगा।

इस क्रम में आर्यिका श्री चंदनामती जी माताजी एवं पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने सभी आने वाले भक्तों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। शाम को भगवंतों एवं पूज्य माताजी की मंगल आरती सम्पन्न की गई।

रात्रि में चातुर्मास की धार्मिक क्रियाओं के अंतर्गत सभी संतों ने भक्तिपाठ आदि का पाठ कर दिग्बंधन सहित अन्य विधियां सम्पन्न कीं। इसके साथ ही चातुर्मास काल का विधिवत शुभारंभ हुआ।

सभा का संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन जम्बूद्वीप, हस्तिनापुर ने किया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों, श्रेष्ठियों एवं पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

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