पीपलांत्री कार्बन क्रेडिट परियोजना का सत्यापन पूरा, अब वाटर क्रेडिट और हरित परिसर साझेदारी पर बड़ा कदम

राजसमंद के पीपलांत्री में कार्बन क्रेडिट परियोजना का सत्यापन पूरा हो गया है। अब वाटर क्रेडिट परियोजना और एमपीयूएटी के साथ हरित परिसर विकसित करने की दिशा में नई पहल शुरू हुई है।

Update: 2026-08-01 11:33 GMT

तस्वीर में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के सभागार में कुलपति डॉ. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में ग्रीन पीपल समिति और टेरा ब्लू क्लाइमेट टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधि बैठक करते हुए।

उदयपुर, 1 अगस्त। राजसमंद जिले की पीपलांत्री ग्राम पंचायत में संचालित कार्बन क्रेडिट परियोजना का दो दिवसीय वैलिडेशन एवं भौतिक वेरिफिकेशन कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। इसके साथ ही पंचायत में वाटर क्रेडिट परियोजना शुरू करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। इन दोनों विषयों पर शनिवार को ग्रीन पीपल समिति एवं टेरा ब्लू क्लाइमेट टेक्नोलॉजी, पुणे की संयुक्त बैठक में विस्तृत समीक्षा करते हुए आगामी कार्ययोजना पर चर्चा की गई।

बैठक में टेरा ब्लू क्लाइमेट टेक्नोलॉजी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप मोटवानी ने बताया कि कंपनी की तकनीकी टीम ने कार्बन क्रेडिट परियोजना के लिए चयनित पीपलांत्री पंचायत में दो दिनों तक फील्ड स्तर पर सत्यापन एवं भौतिक वेरिफिकेशन किया। इस दौरान ग्रीन पीपल समिति ने आवश्यक अभिलेख, तकनीकी जानकारी और स्थानीय समन्वय उपलब्ध कराकर परियोजना को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि वैलिडेशन एवं वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद वीकेयू (VKU) के विशेषज्ञों ने परियोजना के दस्तावेजीकरण के लिए आवश्यक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। इसके लिए ग्रीन पीपल समिति वृक्षारोपण से संबंधित सभी अभिलेख व्यवस्थित कर उपलब्ध कराएगी। साथ ही पौधारोपण स्थलों पर लगाए गए पौधों की प्रजातिवार सूची तैयार कर ली गई है, जिसके आधार पर प्रत्येक प्रजाति के पारिस्थितिक महत्व का तकनीकी विवरण भी तैयार किया जाएगा।

प्रदीप मोटवानी ने बताया कि कार्बन क्रेडिट परियोजना के समानांतर पीपलांत्री में वाटर क्रेडिट विकसित करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। संभावित स्थलों का चयन कर सभी जल संरक्षण एवं वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का सर्वे पूरा किया जा चुका है। शीघ्र ही वाटर क्रेडिट का पृथक परियोजना प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे भविष्य में ग्राम पंचायत को कार्बन क्रेडिट के साथ-साथ वाटर क्रेडिट से भी आय प्राप्त हो सकेगी।

ग्रीन पीपल समिति के अध्यक्ष राहुल भटनागर ने वृक्षारोपण से संबंधित अभिलेखों के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित संधारण पर बल देते हुए समिति के सदस्यों को वीकेयू द्वारा मांगे गए सभी रिकॉर्ड समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बैठक में ग्रीन पीपल समिति के एस.एन. दवे, शरद श्रीवास्तव, सुहेल मजबूर, इंद्रजीत माथुर, डॉ. सतीश शर्मा, प्रताप सिंह चुंडावत, जे.एस. खंगारोत तथा टेरा ब्लू के आशीष नटकुटे उपस्थित रहे।

इस अवसर पर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर में कुलपति डॉ. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में ग्रीन पीपल समिति एवं टेरा ब्लू क्लाइमेट टेक्नोलॉजी के प्रतिनिधियों की बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय परिसर को अधिक हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने, कार्बन अवशोषण बढ़ाने, जैव विविधता संरक्षण तथा बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम संचालित करने के लिए संभावित साझेदारी पर विचार-विमर्श किया गया।

कुलपति डॉ. प्रताप सिंह ने समिति की पर्यावरण संरक्षण संबंधी पहल की सराहना करते हुए विस्तृत परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय तकनीकी परीक्षण के बाद इस दिशा में आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा। बैठक में विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. मनोज महला, डॉ. एल.एन. पवार, डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. आर.के. बेरवा सहित ग्रीन पीपल समिति के एस.एन. दवे, सुहेल मजबूर, इंद्रजीत माथुर एवं शरद श्रीवास्तव उपस्थित रहे।

टेरा ब्लू क्लाइमेट टेक्नोलॉजी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप मोटवानी ने कहा कि संस्था कार्बन क्रेडिट परियोजनाओं के लिए आवश्यक वैज्ञानिक आंकड़ों के विश्लेषण एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराती रहेगी। ग्रीन पीपल समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि इन संयुक्त प्रयासों से कार्बन अवशोषण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा किसानों एवं संस्थाओं के लिए हरित अर्थव्यवस्था के नए अवसर विकसित होंगे।

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