176 साल के इतिहास में पहली बार-महिला वैज्ञानिक वर्षा अगलावे ने संभाली GSI की कमान, रचा नया इतिहास|

वर्षा अशोक अगलावे ने 54वें महानिदेशक के रूप में पदभार संभाला है। वह GSI के 176 साल के इतिहास में यह पद संभालने वाली पहली महिला हैं।

Update: 2026-08-04 04:20 GMT

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की नई महानिदेशक के रूप में वर्षा अशोक अगलावे कोलकाता में पदभार संभालते हुए|

भारतीय वैज्ञानिक इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। देश के सबसे प्रमुख और प्रतिष्ठित भू-वैज्ञानिक संगठन 'जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया' यानी GSI को उसका नया नेतृत्व मिल गया है। वरिष्ठ जियोसाइंटिस्ट वर्षा अशोक अगलावे ने आधिकारिक तौर पर संगठन की 54वीं महानिदेशक (DG) के रूप में अपना पदभार संभाल लिया है। खास बात यह है कि GSI के 176 साल के लंबे इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी महिला को इस सर्वोच्च पद की कमान सौंपी गई है। उनके इस ऐतिहासिक पदभार ग्रहण करने से वैज्ञानिक जगत और देश भर में हर्ष का माहौल है, जो महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिसाल पेश करता है।

कोलकाता स्थित मुख्यालय में पदभार ग्रहण करने वाली वर्षा अगलावे ने असित साहा का स्थान लिया है, जिन्होंने 27 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2026 तक इस पद पर अपनी सेवाएं दी थीं। वर्षा अगलावे का यह सफर और उनका अब तक का अनुभव बेहद प्रेरणादायक रहा है। तीन दशकों से भी अधिक के लंबे और समृद्ध अनुभव के साथ वह देश की जानी-मानी भू-वैज्ञानिक हैं। भारतीय ब्यूरो ऑफ माइन्स में अपनी सेवाएं देने के बाद वह वर्ष 1992 में जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया से जुड़ी थीं। अपने लंबे और शानदार करियर के दौरान उन्होंने GSI के केंद्रीय, उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के साथ-साथ इसके केंद्रीय मुख्यालय में भी कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है। महानिदेशक बनने से पहले वह कोलकाता में GSI के पूर्वी क्षेत्र में एडिशनल डायरेक्टर जनरल और विभाग प्रमुख के रूप में अपनी जिम्मेदारियां निभा रही थीं।

वर्षा अगलावे की पहचान मुख्य रूप से पैलियोन्टोलॉजी यानी जीवाश्म विज्ञान और पैलिनोलॉजी यानी पराग विज्ञान की विशेष विशेषज्ञ के रूप में है। उन्होंने लेट क्रिटेशियस-पैलियोसीन सेडिमेंट्स, K-T बाउंड्री और सतपुड़ा-गोंडवाना बेसिन जैसे जटिल विषयों पर गहन रिसर्च की है। उनके सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदानों में मध्य भारत के सालबार्डी-घोरपेंड क्षेत्र की डायनासोर के घोंसले बनाने की नई जगह के तौर पर सटीक पहचान करना शामिल है। उनकी इसी ख्याति के चलते उन्होंने अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन म्यूजियम ऑफ पैलियोन्टोलॉजी के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैलियोन्टोलॉजिकल रिसर्च में भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया है। इसके अलावा, उन्होंने साल 2023 में टोरंटो में आयोजित प्रतिष्ठित प्रोस्पेक्टर्स एंड डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ कनाडा यानी PDAC कन्वेंशन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए GSI का प्रतिनिधित्व किया था।

केवल फील्ड रिसर्च ही नहीं, बल्कि संस्थागत विकास और प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण में भी उनका बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने लखनऊ में संगठन के उत्तरी क्षेत्र कार्यालय में एक आधुनिक और अत्याधुनिक पैलिनोलॉजी लैब की स्थापना की थी, जिसने देश में इस दिशा में शोध के रास्तों को और आसान बनाया। उन्होंने देश भर में कई बड़े और महत्वपूर्ण जियोसाइंटिफिक प्रोग्राम्स का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है।

पदभार संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में खुलकर बात करते हुए वर्षा अगलावे ने स्पष्ट किया कि GSI अपने सभी कार्यक्रमों को केंद्र सरकार के अहम मिनरल एक्सप्लोरेशन और मिनरल सिक्योरिटी यानी खनिज सुरक्षा पर जोर देने के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाकर आगे बढ़ाएगा। उन्होंने देश की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए एडवांस्ड जियोफिजिकल जांच, तेजी से किए जाने वाले एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम्स और मजबूत लैब इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे गहराई में मौजूद और छिपे हुए मिनरल डिपॉजिट्स की खोज के काम में और अधिक तेजी लाई जा सकेगी।

उन्होंने ऑफशोर मिनरल एक्सप्लोरेशन, प्राकृतिक खतरों के अध्ययन, ग्लेशियोलॉजी यानी हिमनद विज्ञान, अत्याधुनिक जियोसाइंटिफिक रिसर्च, साइंटिफिक पब्लिकेशन और युवा जियोसाइंटिस्ट्स के लिए क्षमता निर्माण को अपने मुख्य फोकस क्षेत्रों के रूप में पहचाना है। उन्होंने संस्था की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और बढ़ती तकनीकी क्षमताओं पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि GSI आज वैज्ञानिक उत्कृष्टता और इनोवेशन के जरिए देश में टिकाऊ संसाधन विकास में मदद करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

आपको बता दें कि कोलकाता में मुख्यालय वाली 'जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया' की स्थापना वर्ष 1851 में हुई थी। खान मंत्रालय के अधीन काम करने वाली यह संस्था भारत की सबसे बड़ी और पुरानी भू-वैज्ञानिक संस्था है। शुरुआत में इसे रेलवे के लिए कोयले के भंडार का पता लगाने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन आज यह संस्थान भू-वैज्ञानिक मैपिंग, खनिज संसाधन का आकलन, भू-भौतिकीय और समुद्री सर्वेक्षण, प्राकृतिक आपदाओं के अध्ययन, हिमनद विज्ञान और देश के राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक डेटाबेस को सहेजने का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। वर्षा अगलावे के नेतृत्व में अब यह प्रतिष्ठित संस्थान नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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