सुप्रीम कोर्ट में बड़ा बदलाव: CJI सूर्यकांत ने हाइब्रिड सुनवाई के दौरान म्यूट कराया वर्चुअल ऑडियो, मेंशनिंग प्रक्रिया पर सख्ती|
सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर 1 में हाइब्रिड सुनवाई के दौरान वकीलों द्वारा मामलों का जिक्र करने पर वर्चुअल लिंक की आवाज म्यूट कर दी गई।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम के भीतर सुनवाई के दौरान संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं।
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर 1 में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और न्यायिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष हाइब्रिड सुनवाई शुरू होने के बाद पहली बार वकीलों की ओर से जरूरी मामलों का जिक्र किए जाने के दौरान वर्चुअल लिंक की आवाज को बंद यानी म्यूट कर दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना होने वाली मेंशनिंग यानी मामलों के जिक्र की प्रक्रिया और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर कानूनी हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में हर कार्य दिवस की सुबह मामलों का जिक्र करना एक अनिवार्य और रोजाना की प्रक्रिया है, जो आमतौर पर सुबह 10:30 बजे बेंच के बैठने के तुरंत बाद शुरू होती है। यह प्रक्रिया अमूमन 10 से 15 मिनट तक चलती है। इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश बेंच के सामने रखे जाने वाले हर मामले की गंभीरता और तात्कालिकता का आकलन करते हैं, जिसके आधार पर या तो तुरंत सुनवाई की तारीख तय की जाती है या फिर मामलों की तुरंत लिस्टिंग से इनकार कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान मुख्य न्यायाधीश अक्सर मामलों पर अपनी संक्षिप्त मौखिक टिप्पणियां भी साझा करते हैं।
यह वर्चुअल ऑडियो म्यूट करने की घटना 29 जुलाई, 2026 को सीजेआई सूर्यकांत द्वारा दी गई उस अहम टिप्पणी के कुछ ही दिनों बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया था कि जरूरी मामलों का जिक्र करना कोई न्यायिक कार्यवाही नहीं है, बल्कि यह एक विशुद्ध रूप से 'प्रशासनिक और कामकाज से जुड़ा' मामला है, इसलिए इसकी मीडिया रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए। इस टिप्पणी से पहले, हाल ही में जब जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ी एक याचिका का जिक्र किया गया था, तो मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा था कि हमारा समय बर्बाद न करें। हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने उस याचिका पर सुनवाई से पूरी तरह मना नहीं किया था, बल्कि कोर्ट की प्राथमिकताओं और प्रक्रिया को रेखांकित किया था।
सुप्रीम कोर्ट में मामलों के बेतरतीब जिक्र और समय के प्रबंधन को लेकर मुख्य न्यायाधीश पहले भी सख्त रुख अपना चुके हैं। पिछले साल एक मामले की सुनवाई के दौरान, जब जज दिन का काम खत्म करके उठने ही वाले थे और एक वकील ने केस का जिक्र करना शुरू कर दिया था, तो सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि इस कोर्ट में किसी मामले का जिक्र करने का कोई निश्चित समय तय नहीं है और यह सिलसिला कभी भी शुरू हो जाता है, जो अब बंद होना चाहिए।
अदालत की कार्यवाही को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश दिया है कि अर्जेंट लिस्टिंग की प्रत्येक रिक्वेस्ट मौखिक तौर पर करने के बजाय 'मेंशनिंग स्लिप' के जरिए लिखित रूप में दी जानी चाहिए। यह निर्देश उन्होंने जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस एएस चंद्रचूड़ की बेंच के सामने एक शहर के कैंटीन को गिराए जाने से जुड़े मामले को अर्जेंट तौर पर मेंशन किए जाने के दौरान दिया था। जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी साफ किया है कि जब तक किसी मामले में किसी की फांसी या अत्यधिक आपातकालीन स्थिति न जुड़ी हो, वह मेंशन किए गए किसी भी मामले को उसी दिन सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट की इस नई व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती से यह स्पष्ट हो गया है कि शीर्ष अदालत अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक अनुशासित तथा सुनियोजित बनाने की दिशा में सख्त कदम उठा रही है।