दोस्तों की महफिल और पक्के यार: जानें फ्रेंडशिप डे के पीछे का दिलचस्प इतिहास और इसकी शुरुआत|

जानिए फ्रेंडशिप डे की शुरुआत सबसे पहले कहां और कैसे हुई थी, अमेरिका से लेकर पैराग्वे और संयुक्त राष्ट्र तक कैसे पहुंचा दोस्ती का यह खास दिन।

Update: 2026-08-02 07:59 GMT

'हैप्पी फ्रेंडशिप डे' ग्राफिक्स, दुनिया के नक्शे और उठे हुए हाथ वैश्विक फ्रेंडशिप डे के इतिहास और इसके अंतरराष्ट्रीय महत्व को दर्शाते हैं।

दोस्त हमारी जिंदगी का बहुत अहम हिस्सा होते हैं। वे हमारी हर खुशी को दोगुना कर देते हैं और हर मुश्किल समय में हमारा साथ निभाकर उसे आसान बना देते हैं। यही वजह है कि हर साल लोग फ्रेंडशिप डे का बहुत बेसब्री से इंतजार करते हैं। इस खास दिन पर दोस्त एक-दूसरे को फ्रेंडशिप बैंड बांधते हैं, तोहफे देते हैं और अपने पुराने पलों को याद करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि दोस्ती के नाम पर एक पूरा दिन समर्पित करने का यह शानदार विचार सबसे पहले किसके मन में आया था? इसकी शुरुआत आखिर किस देश से हुई और यह धीरे-धीरे पूरी दुनिया तक कैसे फैल गया? इस पूरी कहानी के पीछे का सफर बेहद दिलचस्प और रोमांचक है।

फ्रेंडशिप डे की शुरुआत की अगर बात करें तो इसका इतिहास करीब सौ साल पुराना है। सबसे पहले अमेरिका में यह विचार सामने आया था कि दोस्तों के लिए भी साल में एक दिन पूरी तरह से खास होना चाहिए। उस दौर में हॉलमार्क कंपनी की नींव रखने वाले जॉयस हॉल की यह इच्छा थी कि लोग इस बहाने अपने दोस्तों को ग्रीटिंग कार्ड भेजें और उन्हें बताएं कि वे उनकी जिंदगी में कितने महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उस समय बहुत से लोगों को ऐसा लगा कि इस विचार के पीछे सिर्फ अपने ग्रीटिंग कार्ड बेचने का कमर्शियल मकसद छिपा हुआ है। यही कारण था कि शुरुआती दौर में लोगों ने इस आइडिया को बहुत अधिक पसंद नहीं किया और इसे तुरंत नहीं अपनाया गया।

इसके कुछ साल बाद दक्षिण अमेरिका के पैराग्वे देश में इस सोच को एक नई उड़ान और पहचान मिली। साल 1958 में पैराग्वे में कुछ लोगों ने मिलकर एक अनूठी पहल की और दोस्ती के नाम पर एक खास दिन मनाने की औपचारिक शुरुआत की। उन लोगों का यह पक्का मानना था कि दोस्ती केवल दो इंसानों के बीच का व्यक्तिगत रिश्ता नहीं है, बल्कि यह वह ताकत है जो अलग-अलग देशों, संस्कृतियों और समाजों के लोगों को भी एक-दूसरे के बेहद करीब ला सकती है। धीरे-धीरे यह सकारात्मक सोच सीमाओं को पार करके दूसरे देशों तक भी पहुँच गई और दुनिया भर में फ्रेंडशिप डे मनाने का चलन तेजी से बढ़ने लगा।

इस पूरी प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र यानी यूनाइटेड नेशंस की भूमिका भी बहुत अहम रही। दोस्ती की इसी खूबसूरत और वैश्विक सोच को आगे बढ़ाते हुए साल 2011 में संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर 30 जुलाई को 'इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे' के रूप में मनाने की मंजूरी दे दी। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य यह था कि दुनिया भर के लोग आपसी दोस्ती और भाईचारे के जरिए एक-दूसरे के और अधिक करीब आ सकें। हालांकि, दुनिया का हर देश इस दिन को 30 जुलाई को ही नहीं मनाता है। बहुत से देशों ने अपनी सुविधा, संस्कृति और परंपरा के अनुसार इस दिन को मनाने के लिए अलग-अलग तारीखें तय कर रखी हैं।

अगर खासतौर पर भारत की बात करें, तो हमारे देश में फ्रेंडशिप डे हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार यानी संडे को बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। संडे का दिन होने की वजह से लोगों को अपने दोस्तों से मिलने, उनके साथ वक्त बिताने और घूमने का मौका बहुत आसानी से मिल जाता है। नब्बे के दशक के दौरान जब भारत में रंग-बिरंगे फ्रेंडशिप बैंड और ग्रीटिंग कार्ड्स का चलन तेजी से शुरू हुआ, तब से यह दिन स्कूल और कॉलेज के छात्र-छात्राओं के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया।

वक्त के साथ अब तौर-तरीके काफी बदल चुके हैं। आज के डिजिटल युग में लोग केवल बैंड या कार्ड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इंस्टाग्राम पर स्टोरी शेयर करके, रील्स बनाकर, खास तस्वीरें और वीडियो कॉल के जरिए अपने दोस्तों को स्पेशल महसूस कराते हैं। इसके बावजूद फ्रेंडशिप डे का मूल सार आज भी वही पुराना है। यह दिन सिर्फ एक तारीख नहीं है, बल्कि उन दोस्तों को शुक्रिया कहने और याद करने का मौका है जो बिना किसी स्वार्थ के हमेशा हमारे साथ खड़े रहते हैं। एक छोटा सा मैसेज या फोन कॉल भी इस रिश्ते को और मजबूत करता है।

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