हमारी पहुंच से बाहर कुछ नहीं, पहलगाम हमले का बदला लेने वाले 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर वायुसेना प्रमुख का बड़ा बयान|
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए कोई भी लक्ष्य पहुंच से बाहर नहीं है।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह नई दिल्ली में प्रेस को संबोधित करते हुए।
भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' का विशेष रूप से जिक्र करते हुए पड़ोसी देश पाकिस्तान को एक बेहद कड़ी और स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने विश्वास के साथ यह बात कही है कि भारतीय वायुसेना के लिए दुनिया का कोई भी ऐसा लक्ष्य नहीं है जो उनकी पहुंच से बाहर या दूर हो। वायुसेना प्रमुख ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना के जांबाजों ने दुश्मन की सीमा के भीतर तक गहराई में जाकर उसे बेहद करारी और निर्णायक चोट पहुंचाई है, जिसे भविष्य के लिए एक बड़े सैन्य संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
नई दिल्ली में दिए गए अपने बयानों में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने विस्तार से बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' इस बात का सबसे पुख्ता सबूत है कि हमारी वायुसेना किसी भी लक्ष्य को भेदने में पूरी तरह सक्षम है। इस ऐतिहासिक अभियान के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर लगभग 1200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और सीमा रेखा से करीब 200 किलोमीटर भीतर तक घुसकर भारतीय वायुसेना ने अत्यंत सटीक और प्रभावी हमले किए। इन सटीक हमलों ने एक बार फिर यह साबित कर दिखाया कि भारतीय वायुसेना के लिए कोई भी ठिकाना या लक्ष्य असंभव या पहुंच से दूर नहीं है, और उनकी इस टिप्पणी को पाकिस्तान के लिए एक सीधी चेतावनी के तौर पर भी परखा जा रहा है।
समाचार एजेंसी 'पीटीआई-भाषा' को दिए गए अपने एक साक्षात्कार में वायुसेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पूरी तरह से वायुसेना के क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण की सही पुष्टि की है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस विशेष सैन्य अभियान ने यह साबित कर दिया है कि किसी भी प्रकार के राष्ट्रीय संकट या आपात स्थिति में सबसे पहले आगे बढ़कर कार्रवाई करने वाली ताकत और दुश्मन को किसी भी दुस्साहस से रोकने वाली एक प्रभावी सैन्य शक्ति के रूप में वायुसेना की भूमिका बेहद निर्णायक है। हालांकि, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने यह भी बहुत ही जिम्मेदारी के साथ आगाह किया कि वायुसेना के इस दृष्टिकोण के सही साबित होने का यह कतई मतलब नहीं है कि हम अपनी उपलब्धियों पर संतुष्ट होकर यहीं रुक जाएं, बल्कि हमें अपनी सैन्य क्षमताओं को भविष्य के लिए और अधिक मजबूत बनाने तथा उनका निरंतर विस्तार करने की आवश्यकता है।
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान लगातार चार दिनों तक इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील अभियान की कमान खुद संभालने वाले वायुसेना प्रमुख ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक सैन्य अभियान के दृष्टिकोण से हमारे लिए सबसे बड़ी सीख यह मिलती है कि हमें हमेशा अपने पास कई तरह के रणनीतिक विकल्प खुले रखने चाहिए। उन्होंने समझाया कि यदि दुश्मन अपनी युद्ध नीति या रणनीति में अचानक कोई बदलाव करता है, तो हमें भी उतनी ही तेजी से स्थिति के अनुसार खुद को ढालने और अपनी प्रतिक्रिया बदलने की क्षमता हमेशा बरकरार रखनी चाहिए। एयर चीफ मार्शल ने बताया कि क्षमता-केंद्रित बल ऐसे मामलों में स्वाभाविक रूप से काफी बेहतर और लचीले साबित होते हैं, क्योंकि वे किसी एक ही साधन पर निर्भर रहने के बजाय एक साथ कई अलग-अलग साधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने की योग्यता रखते हैं। इसी बेहतरीन लचीलेपन और दूरदर्शिता के कारण भारतीय सेना आवश्यकता पड़ने पर अपनी जवाबी कार्रवाई खुद तय करने में सफल रही और संघर्ष को जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ने से रोकने में पूरी तरह कामयाब रही।
यह पूरा सैन्य अभियान मुख्य रूप से पहलगाम में हुए एक कायराना आतंकवादी हमले के जवाब में कड़ा एक्शन लेने के लिए शुरू किया गया था। इसके तहत पिछले साल यानी मई के महीने में भारत ने अपनी रणनीतिक ताकत का परिचय देते हुए पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले तमाम इलाकों के भीतर सक्रिय आतंकवादी ढांचे और ठिकानों को चुन-चुनकर सटीक हमलों से निशाना बनाया। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो वर्ष 1971 के प्रसिद्ध बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद से भारत की तरफ से सीमा पार जाकर की गई यह अब तक की सबसे साहसिक, बड़ी और निर्णायक सैन्य कार्रवाई मानी जाती है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वायुसेना प्रमुख ने दृढ़ता के साथ यह भी कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता ने यह बात पूरी तरह से प्रमाणित कर दी है कि भारत सरकार और सेना ने सुरक्षा को लेकर जो रास्ता चुना है, वह बिल्कुल सही और सटीक है। हम आने वाले समय में और भी अधिक अटूट संकल्प और तैयारी के साथ इसी सही रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे, ताकि यदि देश को भविष्य में कभी भी भारतीय वायुसेना की आवश्यकता पड़े, तो हमारी फोर्स और अधिक तीव्र गति से, अत्यंत सटीकता के साथ और पूरी तरह से देश की शर्तों पर दुश्मन के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दे सके। इसके साथ ही, एयरफोर्स चीफ ने यह भी गर्व के साथ साझा किया कि इस पूरे अभियान के दौरान देश में स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई कुछ प्रमुख हथियार प्रणालियों ने बेहद शानदार और उम्मीद से बढ़कर प्रदर्शन किया है। इन स्वदेशी हथियारों ने दुश्मन के इलाके में बहुत अंदर तक जाकर उसे भारी और अपूरणीय नुकसान पहुंचाया है। सबसे बड़ी और सराहनीय बात यह रही कि पूरे सैन्य अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने अपनी उस प्रतिबद्धता को पूरी निष्ठा से निभाया, जिसके तहत किसी भी निर्दोष व्यक्ति या गैर-सैनिक संपत्ति को कोई भी नुकसान न पहुंचे।