दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

देश की राजधानी दिल्ली स्थित आधुनिक भारत मंडपम में ‘चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन’ का भव्य तरीके से आगाज किया गया है। इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने करकमलों से किया। इस अवसर पर देश-विदेश से जुड़े संत, अनुयायी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने इस महोत्सव में शामिल होने को अपने जीवन का एक अत्यंत अनोखा और गहरा आध्यात्मिक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि संतों का उनके प्रति जो विशेष स्नेह और आशीर्वाद है, यह आयोजन उसी का एक सुंदर और जीवंत प्रतीक है।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर आधुनिक तकनीक का अनूठा उपयोग देखने को मिला, जिसने प्रधानमंत्री को उनके अतीत की यादों से जोड़ दिया। जब कार्यक्रम में पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद का होलोग्राफिक प्रोजेक्शन प्रदर्शित किया गया और उनके साथ संवाद का अनुभव हुआ, तो पीएम मोदी पूरी तरह भावुक हो गए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह के सामने अपने उस पल को साझा करते हुए कहा कि ऐसा लगा मानो समय पीछे की तरफ मुड़ गया हो और वह आज से 33 साल पहले यानी 1993 के दौर में लौट गए हों। वडोदरा में गुरुदेव के साथ हुई अपनी उस पुरानी मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय का स्नेह, उनके साथ हुई अर्थपूर्ण बातचीत और उनका आशीर्वाद एक बार फिर उनकी आंखों के सामने जीवंत हो उठा। इस अद्भुत और भावुक कर देने वाले अनुभव को संभव बनाने के लिए उन्होंने चिन्मय मिशन के सभी सदस्यों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की और उनका दिल से आभार जताया।

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस पुरानी बातचीत के मुख्य और अहम विषयों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरुदेव के साथ हुई उस मुलाकात के दौरान मुख्य चर्चा का केंद्र देश के युवाओं की शक्ति को निखारना और उनकी असीम क्षमताओं का सही उपयोग करके एक सशक्त व सक्षम भारत का निर्माण करना था। प्रधानमंत्री का मानना है कि देश की युवा शक्ति की ऊर्जा को यदि सही दिशा दे दी जाए और उनकी प्रतिभा को उचित मंच मिले, तो राष्ट्र का भविष्य बेहद उज्ज्वल हो सकता है। गुरुदेव के साथ राष्ट्र निर्माण और युवा शक्ति जैसे गंभीर विषयों पर हुई वह चर्चा आज भी उनके मन में उतनी ही ताज़ा और प्रासंगिक बनी हुई है।

प्रधानमंत्री ने अपने जीवन के सफर को याद करते हुए उस कालखंड का भी जिक्र किया, जब गुरुदेव से मुलाकात होने के कुछ ही वर्षों के बाद उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा करने का बहुमूल्य अवसर प्राप्त हुआ था। उन्होंने बड़े ही विनम्र भाव से कहा कि जनता, जो कि वास्तव में ईश्वर का ही दूसरा रूप है, उसने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी संभालने का आशीर्वाद दिया था। गुरुदेव की स्मृतियों को संजोते हुए उन्होंने इस पूरे सफर को अपने व्यक्तिगत जीवन के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक करार दिया।

इस वैश्विक सम्मेलन के माध्यम से चिन्मय मिशन की समृद्ध विरासत, उसके गहरे आध्यात्मिक विचारों तथा युवाओं की शक्ति के बलबूते पर एक आधुनिक और सशक्त भारत के निर्माण के संकल्प को एक नई दिशा मिली है। भारत मंडपम में आयोजित यह महोत्सव केवल एक धार्मिक या आध्यात्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह अतीत की प्रेरणाओं और भविष्य के संकल्पों का एक खूबसूरत संगम बन गया। प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति और उनके द्वारा साझा किए गए संस्मरणों ने इस पूरे कार्यक्रम को सभी उपस्थित लोगों के लिए और अधिक यादगार और प्रेरणास्पद बना दिया।