स्वच्छता ही सेवा और ऑर्गेनिक खेती का दम, पीएम मोदी की मन की बात में गूंजा वोकल फॉर लोकल और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में आगामी त्योहारों पर साफ-सफाई रखने, ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने और जनभागीदारी पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में 'मन की बात' कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित करते हुए स्वच्छता और जैविक खेती पर बात की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के जरिए एक बार फिर देशवासियों को संबोधित किया। सुबह 11 बजे प्रसारित हुए इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देश के कोने-कोने में आम लोगों द्वारा किए जा रहे सकारात्मक और प्रेरणादायक प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने देशवासियों के इस अमूल्य योगदान और सामाजिक प्रयासों की खुले दिल से सराहना की। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि उनके लिए 'मन की बात' का यह मंच कोई साधारण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह देश के लोगों के प्रयासों को बहुत करीब से जानने और उनके निस्वार्थ योगदान को नमन करने की एक पवित्र तीर्थ यात्रा के समान है। अपने इस संबोधन में प्रधानमंत्री ने देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे बदलावों, जैसे प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक कला-कौशल और आगामी त्योहारों के दौरान स्वच्छता बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
अपने संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने पंजाब में कृषि के क्षेत्र में हो रहे एक बेहतरीन और नवोन्मेषी बदलाव का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार पंजाब में 'खेती विरासत मिशन' नाम की एक संस्था देश में जैविक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को नया जीवन देने का सराहनीय काम कर रही है। इस संस्था की पूरी टीम पंजाब के मालवा क्षेत्र में किसानों को कपास की प्राकृतिक और रसायनरहित खेती करने के लिए प्रेरित कर रही है। इस विशेष और पर्यावरण-अनुकूल पहल को 'नव-त्रिन्जन' नाम दिया गया है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस पहल के तहत किसानों द्वारा बिना किसी हानिकारक केमिकल या रासायनिक खाद का इस्तेमाल किए पूरी तरह से ऑर्गेनिक कपास उगाई जाती है। केवल इतना ही नहीं, मालवा के इस क्षेत्र में प्राकृतिक रंगों वाली कपास भी सफलतापूर्वक उगाई जा रही है। इस प्राकृतिक रूप से रंगीन कपास की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे तैयार किए जाने वाले धागों और कपड़ों को रंगने के लिए अलग से किसी भी तरह के हानिकारक केमिकल या कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल करने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती है।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैंडलूम यानी हथकरघा क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं के आत्मनिर्भर और लगनशील प्रयासों की जमकर तारीफ की। उन्होंने स्वदेशी ऑर्गेनिक कॉटन से बने कपड़ों और देश के पारंपरिक वस्त्र उद्योग का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब हमारी महिलाएं और स्थानीय कारीगर स्वदेशी और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके सुंदर कपड़े तैयार करते हैं, तो इससे न केवल हमारी समृद्ध संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरण को भी बहुत बड़ा बल मिलता है।
पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के पुनरुद्धार की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड का एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक उदाहरण देश के सामने रखा। उन्होंने उत्तराखंड की ऐतिहासिक हेवल नदी का जिक्र करते हुए बताया कि कुछ समय पहले इस नदी का जलस्तर काफी तेजी से घटने लगा था और यह नदी लगभग सूखने के कगार पर पहुंच गई थी। नदी के अस्तित्व पर मंडराते इस खतरे को देखते हुए वहां के स्थानीय निवासियों और स्थानीय प्रशासन ने हाथ मिलाया। दोनों ने मिलकर जल संरक्षण और नदी के पुनरुद्धार के लिए एक बड़ा अभियान चलाया। सामूहिक प्रयास, पौधारोपण और जल स्रोतों की साफ-सफाई के कारण आज हेवल नदी को एक नया जीवनदान मिल चुका है और उसका प्रवाह फिर से लौट आया है। इस सफलता की कहानी को साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश दिया कि जब समाज और आम नागरिक एकजुट होकर किसी भी सार्वजनिक समस्या का समाधान करने के लिए कदम उठाते हैं, तो उसका परिणाम बेहद सकारात्मक, टिकाऊ और बेहतरीन होता है।
संबोधन के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ने देश में आने वाले प्रमुख त्योहारों, विशेष रूप से दिवाली और छठ पूजा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन पावन पर्वों के आगमन को देखते हुए देश भर में जगह-जगह साफ-सफाई के काम और विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। त्योहारों के इस आनंदमय माहौल में स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों के साथ-साथ अपने आसपास के सार्वजनिक स्थलों की सफाई पर भी विशेष ध्यान दें। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सभी जहां भी रहते हैं, वहां साफ-सफाई रखना और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी नागरिकों को दिवाली और छठ पर्व की शुभकामनाएं देते हुए स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन और उत्सवों का अनिवार्य हिस्सा बनाने का आग्रह किया।