टोंक में पुनर्योजी कृषि और सतत खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला पर मंथन, कार्यशाला में जुटे कई हितधारक
टोंक के ओसियांन रिसोर्ट में सॉलिडरिडाड संस्था की मल्टी-स्टेक होल्डर कार्यशाला में पुनर्योजी कृषि और सतत खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला पर चर्चा हुई। कृषि विभाग, किसान संगठनों, एफपीओ और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
टोंक के ओसियांन रिसोर्ट में सॉलिडरिडाड द्वारा पुनर्योजी कृषि और सतत खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला पर आयोजित मल्टी-स्टेकहोल्डर कार्यशाला में शामिल कृषि विभागों, एफपीओ और किसान संगठनों के प्रतिनिधि।
टोंक। पुनर्योजी कृषि और सतत खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सॉलिडरिडाड संस्था की ओर से गुरुवार को टोंक के ओसियांन रिसोर्ट में मल्टी-स्टेक होल्डर कार्यशाला का आयोजन किया गया। नेशनल एलायंस फॉर रिजेनरेटिव एग्रीकल्चर वेज ऑयल सेक्टर प्लेटफॉर्म के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विभागों, संगठनों और कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विभिन्न हितधारकों की भागीदारी और आपसी समन्वय को मजबूत करना, साझा सहमति विकसित करना तथा मल्टी-स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म को सुदृढ़ करना था, ताकि सतत एवं पुनर्योजी खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा दिया जा सके।
कार्यशाला में कृषि विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर, डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), नागरिक समाज संगठन (सीएसओ) तथा भारतीय किसान संघ के प्रांत मंत्री लटूर सिंह गुर्जर शामिल हुए। इनके अलावा जिला अध्यक्ष सुरज्ञान सिंह फौजी, रमेश चंद जाट, टोंक एवं सवाई माधोपुर जिले के प्रतिनिधि, कृषि निवेश कंपनियों के प्रतिनिधि और एनएआरवीओएस के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. सुरेश मोटवानी सहित अन्य सदस्य एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यशाला में बड़ी संख्या में हितधारकों ने भागीदारी की।
कार्यशाला के दौरान पुनर्योजी कृषि, नीतिगत एवं बाजार संबंधी रुझान, स्थिरता, एफपीओ को मजबूत बनाने, कृषि उत्पादों के एकत्रीकरण एवं उनकी आपूर्ति का पता लगाने की व्यवस्था (ट्रेसबिलिटी), बाजार से जुड़ाव और जिम्मेदार श्रम प्रथाओं जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसके साथ ही खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में शामिल विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने और सतत आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला के माध्यम से कृषि विभाग, किसान संगठनों, एफपीओ, नागरिक समाज संगठनों और कृषि निवेश कंपनियों के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाकर पुनर्योजी कृषि एवं सतत खाद्य तेल आपूर्ति श्रृंखला के लिए समन्वय और सहमति विकसित करने पर जोर दिया गया।