टोंक में आरएसएस का पथ संचलन: शरद पूर्णिमा पर 600 स्वयंसेवकों ने किया कदमताल
गांधी खेल मैदान से हाट बाजार तक निकले अनुशासित पथ संचलन के दौरान जिला प्रचारक अशोक जी ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा और राष्ट्रसेवा के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
टोंक में शरद पूर्णिमा पर आयोजित आरएसएस कार्यक्रम में मंच पर अतिथियों के संबोधन को सुनते स्वयंसेवक।
टोंक में शरद पूर्णिमा के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पथ संचलन में करीब 600 गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने अनुशासित कदमताल की। घोष की लयबद्ध धुन के बीच शहर के प्रमुख मार्गों से निकले संचलन का नागरिकों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा और जयघोष के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम में संघ की संगठन शक्ति, सामाजिक एकता और राष्ट्रसेवा के संदेश पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, टोंक नगर की ओर से आयोजित पथ संचलन गांधी खेल मैदान से शुरू हुआ। स्वयंसेवकों का अनुशासित काफिला डिपो, बड़ा कुआं और घंटाघर सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए हाट बाजार मैदान पहुंचा, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। घोष की गूंज, कदमों की एकरूपता और स्वयंसेवकों का अनुशासित स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहा।
कार्यक्रम के मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. एस.के. बृजेश उपस्थित रहे। उनके साथ टोंक जिला सह संघ चालक दिनेश जी और जिला प्रचारक अशोक जी भी मौजूद रहे।
समापन कार्यक्रम में जिला प्रचारक अशोक जी ने बौद्धिक संबोधन के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के उद्देश्यों, वैचारिक आधार और सौ वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों का अवलोकन किया था। उन्होंने अनुभव किया कि संख्या में बहुल होने के बावजूद समाज में संगठित चेतना और सामूहिकता का पर्याप्त अभाव है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संघ की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य समाज को संगठित कर राष्ट्र जीवन को सशक्त बनाना रहा है।
अशोक जी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर 101वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस दीर्घ यात्रा में स्वयंसेवक समाज की एकता, राष्ट्र की अखंडता और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु के गौरव तक पहुंचाने के लिए समाज में संगठन, समरसता, सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जागृत करना आवश्यक है।
अपने उद्बोधन में अशोक जी ने सामाजिक एकजुटता और राष्ट्रीय पुनरुत्थान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने स्वयंसेवकों से समाजहित और राष्ट्रहित के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने का आह्वान किया।
शरद पूर्णिमा पर निकले इस पथ संचलन ने टोंक शहर में उत्साहपूर्ण वातावरण बनाया। नागरिकों की ओर से जगह-जगह की गई पुष्पवर्षा और जयघोष कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। अनुशासित कदमताल और घोष की गूंज के बीच संपन्न हुए संचलन ने संगठन, सामूहिकता और राष्ट्रसेवा के संदेश को प्रस्तुत किया।