टोंक नगर परिषद के वार्ड नंबर 21 से निर्वाचित भाजपा पार्षद रमेशचंद सैनी के निर्वाचन को चुनौती देते हुए न्यायालय में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि रमेशचंद ने नामांकन के दौरान रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत घोषणा पत्र और शपथ पत्र में चेक अनादरण के मामले में मिली एक वर्ष के कारावास और दो लाख रुपए के जुर्माने की सजा की जानकारी छिपाई थी। चुनाव में प्रत्याशी रहे दो लोगों ने इस आधार पर उनका निर्वाचन शून्य घोषित करने की मांग की है।

जिला एवं सेशन न्यायालय, टोंक में अधिवक्ता रामलाल सैनी के माध्यम से सौलंगपुरा चौराहा निवासी रामअवतार पुत्र लादूलाल माली और शंकरपुरा चौराहा कम्पू निवासी मोहन लाल पुत्र चौथमल ने याचिका पेश की है। दोनों याचिकाकर्ता नगर परिषद चुनाव में प्रत्याशी थे। उन्होंने न्यायालय से निर्वाचित पार्षद रमेशचंद पुत्र देवालाल सैनी का निर्वाचन निरस्त करने की मांग की है।

याचिका के अनुसार, नगर परिषद के सभी वार्डों सहित वार्ड नंबर 21 के सदस्य के चुनाव के लिए 27 अगस्त 2026 को लोक सूचना जारी की गई थी। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को मतदान कराया गया। मतदान के पश्चात 14 सितंबर 2026 को मतगणना हुई, जिसमें भाजपा के रमेशचंद को निर्वाचित घोषित किया गया।

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि रमेशचंद ने नामांकन के साथ रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत घोषणा पत्र और शपथ पत्र में स्वयं को किसी न्यायालय से दोषसिद्ध नहीं होना बताया था। जबकि अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या-2, टोंक की अदालत ने चेक अनादरण के नियमित दाण्डिक प्रकरण संख्या 1138/2024 में 8 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए उन्हें परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत एक वर्ष के कारावास और दो लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि अदालत से सजा मिलने के बावजूद रमेशचंद ने नामांकन के दौरान इस मामले की जानकारी घोषणा पत्र और शपथ पत्र में नहीं दी। उनके अनुसार, नामांकन के समय प्रस्तुत दस्तावेजों में दी गई जानकारी वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं थी। इसी आधार पर उन्होंने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 31 और राजस्थान नगरपालिका निर्वाचन याचिका नियम, 2009 के नियम 3 का हवाला देते हुए निर्वाचन निरस्त करने की मांग की है।

याचिका में राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24(1) का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इस प्रावधान के तहत सक्षम न्यायालय से किसी अपराध में छह माह या उससे अधिक के कारावास की सजा पाने वाला व्यक्ति नगरपालिका सदस्य चुने जाने के लिए अयोग्य हो सकता है। उन्होंने अदालत के फैसले और संबंधित कानूनी प्रावधान के आधार पर रमेशचंद का निर्वाचन शून्य घोषित करने की मांग की है।

याचिकाकर्ताओं ने निर्वाचन निरस्त करने के साथ ही चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी रामअवतार को निर्वाचित घोषित करने का आदेश देने की भी मांग की है। इस तरह याचिका में पार्षद के निर्वाचन की वैधता के साथ दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी को निर्वाचित घोषित करने का मुद्दा भी उठाया गया है।

न्यायालय ने 15 अक्टूबर 2026 को अधिवक्ता रामलाल सैनी की उपस्थिति में याचिका का अवलोकन किया और उसे स्वीकार किए जाने के प्रारंभिक चरण में बहस सुनी। इसके बाद न्यायालय ने प्रकरण दर्ज करने और प्रत्यर्थियों के विरुद्ध नोटिस जारी करने के आदेश दिए। मामले में नोटिस की तामील और आगे की सुनवाई के लिए 28 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

फिलहाल मामला न्यायालय में प्रारंभिक प्रक्रिया में है। रमेशचंद के निर्वाचन की वैधता और याचिकाकर्ताओं की ओर से लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।

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