माउंट आबू में सीवरेज चैंबर की सफाई करते कर्मचारी और निरीक्षण करते अधिकारी।

माउंट आबू की पहचान और पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र नक्की झील में पहुंच रहा सीवरेज का गंदा पानी झील की खूबसूरती और पर्यावरण के लिए खतरा बन रहा था। नगर पालिका अध्यक्ष का पद संभालने के बाद सुनील आचार्य ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और सीवरेज व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अधिकारियों को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और जोधपुर नगर निगम से तीन मशीनें माउंट आबू पहुंचीं। सुबह से ही सीवरेज चैंबर्स की सफाई का काम शुरू कर दिया गया।

माउंट आबू की नक्की झील में पिछले कुछ समय से पहुंच रहा सीवरेज का पानी चिंता का कारण बना हुआ था। नए नगर पालिका अध्यक्ष सुनील आचार्य ने पदभार संभालने के दूसरे ही दिन इस समस्या को गंभीरता से लिया। जनता की मांग को देखते हुए उन्होंने राजस्थान सरकार के रुडिप विभाग के अधिकारियों को साफ अल्टीमेटम दिया कि तीन दिन के भीतर माउंट आबू के सीवरेज चैंबर्स की सफाई की जाए और नक्की झील में पहुंच रहे प्रदूषित पानी को रोका जाए। उन्होंने ऐसा नहीं होने पर धरने पर बैठने की बात कही।

अध्यक्ष के अल्टीमेटम के बाद इसका असर दिखाई दिया। जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर जोधपुर नगर निगम से तीन मशीनें और टीम माउंट आबू पहुंची। सुबह से ही सीवरेज चैंबर्स की सफाई का काम शुरू कर दिया गया। मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष सुनील आचार्य के साथ नगर पालिका आयुक्त त्रिकम दान चारण और पालिका प्रशासन मौजूद रहा। प्रशासन का फोकस सीवरेज की समस्या को दूर करने और नक्की झील में गंदा पानी जाने से रोकने पर है।

पिछले चार दिनों में माउंट आबू में नगर पालिका अध्यक्ष सुनील आचार्य लगातार एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। सफाई, सड़कें या शहर की व्यवस्थाएं, अध्यक्ष के निर्देशों के बाद अधिकारी और कर्मचारी मौके पर दिखाई दे रहे हैं। नक्की झील और मुख्य मार्गों पर भी कई अवरोध हटाए गए हैं। इसके बाद कई जगह सड़कें पहले की तुलना में ज्यादा खुली और व्यवस्थित नजर आ रही हैं। अब नक्की झील की सफाई और सीवरेज व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन ने काम शुरू कर दिया है।

नगर पालिका अध्यक्ष के मुताबिक नक्की झील को स्वच्छ रखना सिर्फ पालिका की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे माउंट आबू की प्राथमिकता है। सीवरेज का पानी झील तक न पहुंचे, इसके लिए चैंबर्स की सफाई और व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम जारी है। पदभार संभालने के शुरुआती दिनों में ही सड़कों पर उतरकर काम की निगरानी कर रहे सुनील आचार्य को लेकर स्थानीय लोगों में भी चर्चा है। अब शुरुआती कार्रवाई के बाद यह अभियान कितनी मजबूती से आगे बढ़ता है और माउंट आबू की नक्की झील को प्रदूषण से कितनी स्थायी राहत मिलती है, इस पर नजर रहेगी।

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