टोडाभीम में तेज बारिश और आंधी से कटी बाजरे की फसल भीगी, मुआवजे की मांग
26 एमएम बारिश से खेतों में पानी भरने के कारण कटाई के बाद रखी फसल को नुकसान, किसानों ने गिरदावरी करवाकर मुआवजा देने की मांग की।
टोडाभीम के जलभराव वाले खेत में कटी हुई बाजरे की फसल संभालते किसान।
टोडाभीम क्षेत्र में रविवार रात करीब 8 बजे तेज आंधी के साथ हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। तहसील कार्यालय में कार्यरत भू-अभिलेख निरीक्षक सुभाष मीना ने बताया कि क्षेत्र में रात के दौरान 26 एमएम बारिश दर्ज की गई। अचानक हुई तेज बारिश से खेतों में पानी भर गया और कटाई के बाद खेतों में रखी बाजरे की फसल भीग गई। कई स्थानों पर बाजरे की बालियां पानी में तैरती नजर आईं।
किसानों ने बताया कि बाजरे की फसल पकने के बाद कटाई शुरू कर दी गई थी। कई किसानों ने फसल काटकर खेतों में ही ढेर लगा दिए थे, ताकि मौसम साफ होने पर उसे सुखाकर घर ले जा सकें। रविवार रात अचानक तेज हवा चली और इसके बाद बारिश शुरू हो गई। कुछ ही देर में खेतों में पानी भर गया, जिससे कटी हुई फसल भीग गई।
सोमवार सुबह खेतों पर पहुंचे किसानों को जगह-जगह पानी भरा मिला और कटी हुई फसल भीगी हुई नजर आई। किसानों के अनुसार बाजरे की बालियों में पानी और नमी पहुंचने से दाने खराब होने की आशंका है। यदि फसल समय पर नहीं सूखी तो उपज की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। तैयार फसल खराब होने की आशंका ने किसानों के सामने महीनों की मेहनत और लागत दोनों डूबने का संकट खड़ा कर दिया है।
प्रदेश के प्रगतिशील किसान व पूर्व जिला प्रमुख शिवदयाल मीना सहित क्षेत्र के किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में बीज, खाद, जुताई, बुवाई और कटाई पर बड़ी राशि खर्च हुई है। ऐसे में तैयार फसल बारिश की भेंट चढ़ने से उनकी पूरी लागत और आय प्रभावित होने की स्थिति है। पूर्व जिला प्रमुख व प्रदेश के प्रगतिशील किसान नेता शिवदयाल मीना ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में तत्काल गिरदावरी एवं फसल नुकसान का सर्वे करवाकर प्रत्येक प्रभावित किसान को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि नुकसान का आकलन समय पर नहीं हुआ तो वास्तविक क्षति दर्ज नहीं हो पाएगी। किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का तत्काल सर्वे कर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
इधर, तूफान और बारिश के कारण आसपास के कई गांवों में रात से बिजली आपूर्ति भी बाधित है। इससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने बिजली आपूर्ति शीघ्र बहाल कराने की भी मांग की है। बारिश के बाद खेतों में पानी भरने और कटी बाजरे की फसल भीगने से किसानों के सामने अब नुकसान के आकलन और मुआवजे की उम्मीद का सवाल खड़ा हो गया है।