आश्विन शुक्ल प्रतिपदा रविवार, 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र प्रारम्भ होंगे। नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना और देवी पूजन के लिए शुभ मुहूर्त को लेकर पं. मोहनाचार्य ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि देवी पुराण में प्रातःकाल देवी का आह्वान, स्थापना और पूजन करने का विधान बताया गया है। इसमें चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को त्याज्य माना गया है, हालांकि दोनों के आदि के दो चरणों को छोड़कर घट स्थापना करने की अनुमति भी दी गई है।

पं. मोहनाचार्य के अनुसार 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र के प्रथम दो चरण प्रातः 10 बजे से 8 मिनट तक और वैधृति योग के प्रथम दो चरण प्रातः 9 बजे से 34 मिनट तक रहेंगे। ऐसे में प्रातःकाल घट स्थापना नहीं करने और लाभ-अमृत के चौघड़िया में सुबह 10 बजकर 5 मिनट से दोपहर 12 बजकर 15 मिनट तक घट स्थापना करने की सलाह दी गई है। उन्होंने बताया कि सर्वश्रेष्ठ अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जिसमें घट स्थापना करना शुभ रहेगा।

पं. मोहनाचार्य ने बताया कि माता का वाहन सिंह माना जाता है, लेकिन देवी भागवत के अनुसार देवी मां हर वर्ष नवरात्र में अलग-अलग वाहन से पृथ्वी पर आती हैं। इस बार देवी मां हाथी पर बैठकर पृथ्वी पर पधारेंगी। देवी के वाहन के अनुसार फल का आकलन भी किया जाता है। हाथी पर सवार होकर आने से अच्छी बरसात होने का योग बनता है।

नवरात्र में देवी मां की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान दुर्गा सप्तशती पाठ, नवचंडी, शतचंडी और सहस्त्र चंडी के रूप में आराधना की जाती है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस के पारायण का भी विशेष महत्व है। नवरात्र में आराधना करने से मां शीघ्र प्रसन्न होकर धन-धान्य, पुत्र-पौत्र और अतुल संपत्ति प्रदान करती हैं।

नवरात्र का समापन विजयादशमी पर्व के साथ होगा। 20 अक्टूबर मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा पर्व मनाया जाएगा।

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