तस्वीर में टोडारायसिंह के खेड़ी-खेड़ान स्थित श्री न्याला बाबा धाम पर वार्षिक मेले के दौरान मंदिर परिसर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है।

टोडाभीम तहसील क्षेत्र के गांव खेड़ी-खेड़ान स्थित प्रसिद्ध श्री न्याला बाबा धाम पर गुरुवार को वार्षिक मेले के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही बाबा के दर्शन के लिए कतारें लगने लगीं। आसपास के दर्जनों गांवों के साथ दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु धाम पहुंचे। श्री न्याला बाबा धार्मिक सेवा समिति, खेड़ी (खेड़ान) के तत्वावधान में आयोजित धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर दिनभर बाबा के जयकारों से गूंजता रहा।

मेले में श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की। कई श्रद्धालु परिवार सहित दर्शन करने पहुंचे। उन्होंने बाबा के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और बाबा के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर खीर-पुए की प्रसादी ग्रहण की। सेवा समिति के कार्यकर्ताओं और धर्मप्रेमी लोगों ने श्रद्धालुओं को प्रसादी परोसी। भंडारे के दौरान युवाओं सहित ग्रामीणों ने आयोजन में बढ़-चढ़कर सहयोग किया।

श्रद्धालुओं का कहना था कि नायला बाबा के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मन को शांति और आत्मिक संतोष मिलता है। वार्षिक मेले में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं में भी बाबा के प्रति गहरी आस्था देखने को मिली। कई श्रद्धालुओं ने दर्शन के बाद प्रसादी ग्रहण की और आयोजन में सहयोग किया।

धार्मिक आयोजन को लेकर गांव में भी उत्साह का माहौल रहा। सुबह से मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र श्रद्धालुओं से भरा रहा। समिति के सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं, ग्रामीणों और धर्मप्रेमी बंधुओं का आभार जताया।

ग्रामीण अंचल में प्राचीन समय से मान्यता चली आ रही है कि सांप, बिच्छू या किसी जहरीले कीड़े के काटने पर बाबा के नाम का झाड़ा लगाने से रोगी को राहत मिलती है। इसी आस्था के चलते आज भी लोग संकट की घड़ी में बाबा के दरबार पहुंचते हैं। मान्यता है कि बाबा के नाम का जाप और झाड़ा लगते ही पीड़ित को आराम महसूस होने लगता है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा ग्रामीणों की बाबा के प्रति गहरी श्रद्धा और विश्वास को दर्शाती है। हालांकि जहरीले जीव के काटने पर चिकित्सकीय उपचार लेना भी जरूरी है।

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