सवाई माधोपुर जिले में पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूती देने की दिशा में 24 नवचयनित पशु चिकित्सा अधिकारियों ने कार्यग्रहण कर लिया है। पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती-2025 के तहत राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित इन अधिकारियों ने परिणाम जारी होने के बाद जिले में अपनी जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यग्रहण पर कार्यालय संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, सवाई माधोपुर में स्वागत किया गया।

इस अवसर पर संयुक्त निदेशक डॉ. राजीव गर्ग ने नवचयनित पशु चिकित्सा अधिकारियों को कार्यग्रहण करवाया और उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अधिकारियों से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को बेहतर और समयबद्ध पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने का आह्वान किया, ताकि पशुओं के उपचार और देखभाल से जुड़ी आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सके।

डॉ. राजीव गर्ग ने कहा कि सवाई माधोपुर जिले में बड़ी संख्या में पशुपालक पशुपालन पर निर्भर हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के उपचार, टीकाकरण और अन्य आवश्यक पशु चिकित्सा सेवाओं की प्रभावी उपलब्धता महत्वपूर्ण है। उन्होंने नव नियुक्त अधिकारियों को विभागीय योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा पशुपालकों तक इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

सवाई माधोपुर जिले में कार्यग्रहण करने वाले नवचयनित पशु चिकित्सा अधिकारियों में डॉ. पवन कुमार, डॉ. विवेकानन्द, डॉ. डेविड मीना, डॉ. सतवीर सिंह, डॉ. रोहित, डॉ. बृजेशम मीना, डॉ. मदनमोहन, डॉ. नेहा, डॉ. सक्षम, डॉ. रजनी मीना, डॉ. पवन कुमार, डॉ. कपिल, डॉ. शिवप्रसाद, डॉ. भविष्य अग्रवाल, डॉ. मनोज कुमार, डॉ. पंकज, डॉ. अंकित, डॉ. विजय, डॉ. प्रान्जल मीना, डॉ. रविशंकर, डॉ. रामजीलाल, डॉ. विक्रम और डॉ. जयन्तराज शामिल हैं।

कार्यग्रहण के बाद नव नियुक्त पशु चिकित्सा अधिकारियों ने कहा कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को बेहतर उपचार और पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करेंगे। उन्होंने पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और पात्र पशुपालकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास करने की बात कही।

जिले में 24 नवचयनित पशु चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होने और पशुपालन विभाग की योजनाओं के प्रभावी संचालन को गति मिलने की उम्मीद है। इससे पशुओं के उपचार, टीकाकरण और अन्य आवश्यक सेवाओं के साथ-साथ पात्र पशुपालकों तक विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने की जिम्मेदारी को भी मजबूती मिलेगी।

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