विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर डॉक्टर ने सुनाई डिप्रेशन की कहानी, नशा मुक्ति का संदेश
सवाई माधोपुर जिला चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. प्रिया चौधरी ने अपने डिप्रेशन से उबरने का अनुभव साझा किया।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर 2026 को सवाई माधोपुर जिला चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मौजूद चिकित्सक और नर्सिंग छात्र-छात्राएं।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर 2026 को सवाई माधोपुर जिला चिकित्सालय में आयोजित कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर आंकड़ों के साथ अवसाद से उबरने का अनुभव भी साझा किया गया। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में मनोचिकित्सक डॉ. प्रिया चौधरी ने अपने डिप्रेशन की कहानी सुनाई। एक डॉक्टर के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह उन्होंने मदद लेकर अवसाद से बाहर आने का रास्ता खोजा। उनकी आपबीती सुनकर सभागार में मौजूद नर्सिंग छात्र-छात्राएं और स्टाफ भावुक हो गए।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), सवाई माधोपुर की सचिव सुश्री समीक्षा गौतम रहीं। कार्यक्रम का संयोजन मनोरोग विशेषज्ञ एवं जिला नोडल अधिकारी, NMHP डॉ. गौरव चंद्रवंशी ने किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में पीएमओ डॉ. तेजराम मीणा मौजूद रहे।
डॉ. गौरव चंद्रवंशी ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और जरूरत के बीच अंतर को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत में वर्तमान में लगभग 15 करोड़ लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता है। इसके बावजूद देश में प्रति एक लाख जनसंख्या पर केवल 0.75 मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानक प्रति एक लाख आबादी पर तीन मनोचिकित्सकों का है। राजस्थान में यह आंकड़ा मात्र 0.10 मनोचिकित्सक प्रति एक लाख जनसंख्या है।
उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2024 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि देश में 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 14,488 विद्यार्थी शामिल थे। उन्होंने इसे चिंता का विषय बताया। साथ ही कहा कि मानसिक रोगों के उपचार में अंतराल 79 प्रतिशत तक है। इस अंतर को कम करने के लिए टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।
इस वर्ष विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम “जीवन के वास्तविक अनुभवों की आवाज सुनी जाए - सच्ची आवाजें, वास्तविक बदलाव” रखी गई। इसी संदेश को केंद्र में रखते हुए मनोचिकित्सक डॉ. प्रिया चौधरी ने मंच से अपने जीवन में अवसाद से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि डॉक्टर होने के बावजूद उन्हें भी डिप्रेशन का सामना करना पड़ा और उचित मदद लेकर वह इससे बाहर आईं। उनके अनुभव ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को सामने रखा और कार्यक्रम में मौजूद लोगों को वास्तविक जीवन के अनुभवों को सुनने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के दौरान नर्सिंग छात्र-छात्राओं ने मानसिक स्वास्थ्य और नशा मुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया, जिसकी उपस्थित लोगों ने सराहना की। मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के दौरान आयोजित पोस्टर, निबंध और स्लोगन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मुख्य अतिथि सुश्री समीक्षा गौतम ने पुरस्कृत किया। कार्यक्रम में सभी बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में मनोचिकित्सक डॉ. अंशुल यादव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, अवसाद से जुड़े वास्तविक अनुभवों को साझा करने और नशा मुक्ति का संदेश देने पर विशेष जोर रहा।