करौली वृद्धाश्रम के कमरे में अधिकारी वृद्धजनों से बातचीत कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं।   

करौली स्थित वृद्धाश्रम में वरिष्ठ नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार और अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, करौली के मार्गदर्शन में 28 अक्टूबर 2026 को किए गए औचक निरीक्षण में कर्मचारियों की उपस्थिति, भोजन एवं अल्पाहार वितरण, स्वास्थ्य सुविधाओं और साफ-सफाई सहित विभिन्न व्यवस्थाओं में कमियां पाई गईं। निरीक्षण प्रताप सिंह मीना, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, करौली एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश, करौली द्वारा विवेक वर्धनी शिक्षा एवं मनोविकास सेवा समिति की ओर से संचालित वृद्धाश्रम में किया गया।

निरीक्षण के दौरान वृद्धाश्रम में केवल दो कर्मचारी उपस्थित मिले। इनमें प्रभारी अजीत यादव और एक रसोइया शामिल थे। रसोइया राकेश सैन अनुपस्थित पाया गया, जबकि उसकी जगह मोहरबाई रसोई का काम कर रही थीं। जांच में सामने आया कि मोहरबाई का नाम उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज नहीं था, जबकि अनुपस्थित रसोइये राकेश सैन की उपस्थिति दर्ज की गई थी।

उपस्थिति रजिस्टर में वृद्धाश्रम में रहने वाले 16 वृद्धजनों के नाम दर्ज थे और उनकी उपस्थिति भी अंकित थी, लेकिन मौके पर केवल 12 वृद्धजन ही उपस्थित मिले। वृद्धजनों से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह से चाय नहीं दी गई थी और नाश्ता भी समय पर उपलब्ध नहीं कराया जाता है।

अल्पाहार रजिस्टर की जांच में 5 किलोग्राम दूध, 5 किलोग्राम फल, 5 किलोग्राम चीनी, 46 टोस्ट और 23 बिस्किट पैकेट की प्रविष्टियां दर्ज मिलीं। हालांकि, निरीक्षण के दौरान वृद्धजनों को नियमानुसार अल्पाहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था नहीं पाई गई। रजिस्टर में दर्ज सामग्री की प्रविष्टियों और मौके पर अल्पाहार वितरण की स्थिति के बीच भी अंतर सामने आया।

भोजन व्यवस्था की जांच में एक और अनियमितता उजागर हुई। निर्धारित मेन्यू में चपाती, मंगोड़ी और बैंगन-टमाटर की सब्जी दर्ज थी, जबकि वृद्धजनों को पालक वाला दलिया दिया जा रहा था। वृद्धजनों ने बताया कि उन्हें सूखी रोटियां दी जाती हैं और रोटियों पर घी भी नहीं लगाया जाता। इस संबंध में पूछे जाने पर वृद्धाश्रम प्रभारी अजीत यादव ने बताया कि केवल एक रोटी पर घी लगाकर उसकी फोटो उच्च स्तर पर भेज दी जाती है, जबकि अन्य रोटियों पर घी नहीं लगाया जाता।

वृद्धाश्रम में निवासरत बुजुर्गों के मनोरंजन और गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच में भी वास्तविक स्थिति से अंतर पाया गया। कार्य रजिस्टर में वृद्धजनों के कैरम बोर्ड खेलने की प्रविष्टि दर्ज थी, लेकिन पूछताछ के दौरान वृद्धजनों ने बताया कि उन्हें कैरम बोर्ड खेलना ही नहीं आता।

स्वास्थ्य सुविधाओं के निरीक्षण में मेडिकल किट उपलब्ध मिली, लेकिन उसमें रखी दवाइयों के बारे में वृद्धाश्रम प्रभारी स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि किट में कौन-कौन सी दवाइयां उपलब्ध हैं और उनका उपयोग किस परिस्थिति में तथा किस वृद्धजन के लिए किया जाना है। वृद्धाश्रम में कार्यरत कर्मचारियों को दवाइयों के उपयोग संबंधी पर्याप्त प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके अलावा, वृद्धजनों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए चिकित्सकीय व्यवस्था की स्थिति भी संतोषजनक नहीं पाई गई।

निरीक्षण के दौरान वृद्धाश्रम में साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली। भोजन की गुणवत्ता, निर्धारित मेन्यू के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने, अल्पाहार वितरण, कर्मचारियों की उपस्थिति, स्वास्थ्य सुविधाओं और वृद्धजनों के मनोरंजन से संबंधित व्यवस्थाओं में कमियां सामने आईं।

इन अनियमितताओं के संबंध में वृद्धाश्रम प्रभारी अजीत यादव से जानकारी और स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन वह संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं कर सके।

निरीक्षण का उद्देश्य वृद्धाश्रम में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, समुचित भोजन, स्वच्छ वातावरण, नियमित स्वास्थ्य सुविधाएं और आवश्यक देखभाल उपलब्ध होना सुनिश्चित करना था। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और कल्याण से संबंधित व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया।

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