केलादेवी में महर्षि वाल्मीकि प्रकट उत्सव पर भव्य शोभायात्रा, शिक्षा और एकता का दिया संदेश
कैलादेवी में भगवान महर्षि वाल्मीकि के प्रकट उत्सव पर शोभायात्रा और सामाजिक सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें शिक्षा और एकजुटता पर जोर दिया गया।
कैलादेवी में आयोजित वाल्मीकि प्रकट उत्सव के मंच पर अतिथि और प्रतिभागी खड़े दिखाई दे रहे हैं।
केलादेवी में भगवान महर्षि वाल्मीकि के प्रकट उत्सव के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसके साथ ही सामाजिक सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के लोगों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने भाग लेकर भगवान वाल्मीकि के आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा समाज में शिक्षा, जागरूकता और एकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
शोभायात्रा के दौरान भगवान वाल्मीकि के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया। जगह-जगह समाज के लोगों ने शोभायात्रा का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। आयोजन में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। शोभायात्रा के बाद आयोजित सामाजिक सम्मेलन में समाज की शिक्षा, एकजुटता, जागरूकता और भावी पीढ़ी के उत्थान से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन में सतीश धामोनिया ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। आयोजन समिति और समाज के गणमान्य लोगों ने उनका स्वागत एवं सम्मान किया। अपने संबोधन में धामोनिया ने शिक्षा को समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि समाज में शिक्षा की गति बढ़ाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने और युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया।
धामोनिया ने कहा कि शिक्षित और जागरूक युवा ही समाज को नई दिशा दे सकते हैं। शिक्षा से व्यक्ति न केवल आत्मनिर्भर बनता है, बल्कि अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होता है। उन्होंने भगवान वाल्मीकि के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में भाईचारे, समानता, शिक्षा और एकता को मजबूत करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में पार्षद विजेंद्र बमनावत ने भी समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। सम्मेलन का मंच संचालन रानू गेचंद ने किया। अंत में वाल्मीकि सेवा समिति युवा प्रकोष्ठ कैला देवी के जितेंद्र बाल्मीकि ने बाहर से पधारे सभी अतिथियों का आभार जताया। उन्होंने समाज के महापुरुषों की जीवनियों पर प्रकाश डालते हुए उनके बलिदान और त्याग के बारे में भी बताया।
भगवान महर्षि वाल्मीकि के प्रकट उत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज में शिक्षा, एकजुटता, जागरूकता और महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया गया।