राजकीय महाविद्यालय आमेट में गुरुवंदन कार्यक्रम का आयोजन, गुरु-शिष्य परंपरा और संस्कारों पर दिया गया जोर
राजकीय महाविद्यालय आमेट में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) की स्थानीय इकाई ने गुरुवंदन कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में डॉ. मनोज कुमार बहरवाल और प्राचार्य श्री रामकेश मीणा ने गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना के महत्व पर अपने विचार रखे।
तस्वीर में राजकीय महाविद्यालय आमेट के हॉल में आयोजित गुरुवंदन कार्यक्रम के दौरान मंच से संबोधित करते हुए वक्ता और सामने बैठे छात्र-छात्राएं नजर आ रहे हैं।
राजकीय महाविद्यालय आमेट में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान (उच्च शिक्षा) की स्थानीय इकाई द्वारा गुरुवंदन कार्यक्रम का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों ने माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के सामूहिक गायन के साथ किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. मनोज कुमार बहरवाल, प्राचार्य, सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर एवं प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (राजस्थान–उच्च शिक्षा) ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करते, बल्कि संस्कार, चरित्र और राष्ट्रभक्ति की भावना का भी निर्माण करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति तथा राष्ट्रीय चेतना के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राजकीय महाविद्यालय आमेट के प्राचार्य श्री रामकेश मीणा ने कहा कि गुरु का सम्मान भारतीय संस्कृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, अनुशासन एवं कृतज्ञता की भावना को सुदृढ़ करते हैं तथा शिक्षा को संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं।
इस अवसर पर अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं उपरना भेंट कर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कैलाश चन्द्र खटीक, सहायक आचार्य एवं एबीआरएसएम राजसमंद जिला सह सचिव ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संगठन के ध्येय वाक्य “राष्ट्र के हित में शिक्षा, शिक्षा के हित में शिक्षक, शिक्षक के हित में समाज” विषय पर कार्य करने पर बल दिया।
कार्यक्रम में सहायक आचार्य श्री हिमांशु शर्मा, राकेश कुमार, आस्था महरिया, अशरफ रंगसाज, लालसिंह, छात्र नेता राजेश गहलोत, कार्तिकेय बटवाल सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक आचार्य श्रीमती रामेश्वरी ने किया तथा समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कार्यक्रम के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति और शिक्षा के साथ संस्कारों के महत्व पर विशेष बल दिया गया।