आमेट में विधिक जागरूकता शिविर: अच्छे-बुरे स्पर्श की पहचान सिखाकर बच्चों को सुरक्षा के प्रति किया जागरूक

आमेट के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में "ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे" अभियान के तहत आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में विद्यार्थियों को अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान, सुरक्षा उपायों तथा हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी गई। जानिए शिविर में क्या-क्या महत्वपूर्ण संदेश दिए गए।

Update: 2026-08-04 10:50 GMT

तस्वीर में आमेट के स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर के दौरान मंच से संबोधित करतीं न्यायिक अधिकारी और नीचे बैठे विद्यार्थी नजर आ रहे हैं।

आमेट में मंगलवार को राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजसमंद के तत्वावधान में "ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे" अभियान के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलका शर्मा (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) तथा सचिव भारत भूषण पाठक के निर्देशानुसार आयोजित हुआ।

शिविर के दौरान अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति (सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट) आमेट प्रियंका चौहान ने विद्यार्थियों को "अच्छा स्पर्श, बुरा स्पर्श—फर्क समझो, सुरक्षित रहो" विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित स्पर्श की पहचान कराते हुए किसी भी अनुचित व्यवहार की स्थिति में बिना भय के अपने माता-पिता, शिक्षक अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को तत्काल जानकारी देने के लिए प्रेरित किया।

प्रियंका चौहान ने सरल एवं सहज भाषा में विद्यार्थियों को समझाया कि गुड टच वह स्पर्श है जिससे बच्चा सुरक्षित, सम्मानित और सहज महसूस करता है, जबकि बैड टच ऐसा स्पर्श होता है जिससे डर, असहजता या शर्मिंदगी महसूस हो। उन्होंने कहा कि किसी भी गलत स्पर्श या अनुचित व्यवहार को कभी भी छिपाना नहीं चाहिए और ऐसी स्थिति में तुरंत किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों की भी जानकारी दी।

शिविर में मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी गिरजाशंकर मिश्रा, अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी नारायण सिंह राव, विद्यालय के प्रधानाचार्य निलेश कुमार, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास विकसित करना, शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना तथा उन्हें स्वयं अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना रहा।

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