तस्वीर में तेरापंथ सभा भवन आमेट में आयोजित भगवती संवत्सरी महापर्व के धार्मिक कार्यक्रम का दृश्य है, जिसमें श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की।

पर्युषण महापर्व के आठवें एवं अंतिम दिन तेरापंथ सभा भवन आमेट में युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के दिशा-निर्देशानुसार भगवती संवत्सरी महापर्व पूरी श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक वातावरण के साथ मनाया गया। 15 सितंबर को आयोजित इस पावन अवसर पर नाथद्वारा से पधारे उपासक प्रवक्ता श्री गणेशलाल जी मेहता और श्री सुभाष जी सामोता ने धर्मसभा को संबोधित किया तथा संवत्सरी महापर्व के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।

धर्मसभा में उपासक प्रवक्ता श्री गणेशलाल जी मेहता ने भगवान महावीर की जीवन यात्रा और केवलज्ञान की प्राप्ति तक के आध्यात्मिक प्रसंगों को विस्तारपूर्वक समझाया। उन्होंने बताया कि भगवान महावीर ने कठोर साधना, तप, संयम और आत्मानुशासन के जरिए अपने जीवन को साधना की ऊंचाइयों तक पहुंचाया और केवलज्ञान प्राप्त कर समस्त जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। इसके साथ ही उन्होंने उपस्थित जनों को आत्मशुद्धि, क्षमा, संयम और समता को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।

वहीं, उपासक प्रवक्ता श्री सुभाष जी सामोता ने चंदनबाला की प्रेरणादायी जीवनी का वर्णन किया और उनके जीवन में आए संघर्ष, त्याग, धैर्य तथा धर्मनिष्ठा के प्रसंगों से श्रावक समाज को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ आस्था और संयम के साथ जीवन जीने से आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

आयोजन के दौरान तेरापंथ सभा, तेरापंथ महिला मंडल तथा राजा बाबू द्वारा भावपूर्ण गीतिकाओं की प्रस्तुति दी गई, जिससे पूरा सभा भवन भक्तिमय और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो गया। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ इस धार्मिक कार्यक्रम में अपनी सहभागिता निभाई। कार्यक्रम के दौरान उपासक प्रवक्ता द्वारा तपस्या एवं पोषध के पचक्खाण भी करवाए गए। इस महापर्व के माध्यम से आत्मावलोकन, क्षमाभाव, त्याग, तप और संयम की प्रेरणा देते हुए सभी को आध्यात्मिक साधना के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। इस पूरे कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी तेरापंथ सभा प्रतिनिधि पवन कच्छारा ने दी।

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