हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जेल में आसाराम बापू, गंभीर हृदय रोग के बीच चिकित्सा सुविधाओं पर उठे सवाल
87 वर्षीय आसाराम बापू को गंभीर हृदय रोगों के बावजूद जोधपुर सेंट्रल जेल में रखने और आरोग्यम अस्पताल की चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलने का आरोप लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की पालना और जेल प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।
जोधपुर जेल में बंद आसाराम बापू के इलाज को लेकर परिजनों ने सवाल उठाए हैं।
87 वर्षीय आसाराम बापू को गंभीर हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद सेंट्रल जेल जोधपुर में रखे जाने को लेकर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। परिजनों एवं उनके प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि राजस्थान हाईकोर्ट के 1 जुलाई 2026 के आदेश में पूर्व में स्वीकृत आरोग्यम अस्पताल की चिकित्सा सुविधाएं एवं देखरेख जारी रखने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद उन्हें जेल में दाखिल कर दिया गया और आरोग्यम अस्पताल में उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई।
परिजनों के अनुसार, आसाराम बापू को 13 अक्टूबर 2026 को NSTEMI (हार्ट अटैक) हुआ था। इसके बाद 20 अक्टूबर को एट्रियल फिब्रिलेशन (हृदय की अनियमित धड़कन) और 22 अक्टूबर को पोस्ट-MI एंजाइना की समस्या सामने आई। MGM मेडिकल कॉलेज एवं संबंधित अस्पतालों, इंदौर के कार्डियोलॉजिस्ट की 23 अक्टूबर की रिपोर्ट में उनकी गंभीर हृदय संबंधी स्थिति को देखते हुए विशेष सावधानी और निकट चिकित्सा निगरानी की आवश्यकता बताई गई।
परिजनों का कहना है कि ऐसी स्वास्थ्य स्थिति में नियमित हृदय निगरानी, आपातकालीन दवाइयों, जीवनरक्षक उपकरणों और प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता आवश्यक है। उनका दावा है कि जेल की डिस्पेंसरी स्तर की चिकित्सा सुविधाएं उनकी जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं, जबकि आरोग्यम अस्पताल में आयुर्वेद के साथ इंटीग्रेटेड मेडिसिन की सुविधा उपलब्ध है।
परिजनों ने जेल में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि अत्यधिक उम्र, शारीरिक कमजोरी और सार्कोपीनिया (मांसपेशियों की कमजोरी) के कारण आसाराम बापू को खड़े होने और जमीन पर बैठने में परेशानी होती है। इसके बावजूद स्नान के लिए गर्म पानी और बैठने के लिए कुर्सी जैसी सामान्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
परिजनों के अनुसार, दैनिक गतिविधियों में आवश्यक सहायता नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ने की आशंका है। उन्होंने इस स्थिति को देखते हुए जेल में उनकी चिकित्सा जरूरतों और दैनिक आवश्यकताओं के अनुरूप उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की पालना को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। परिजनों एवं प्रतिनिधियों ने पूछा है कि जब हाईकोर्ट के आदेश में पूर्व स्वीकृत चिकित्सा सुविधाएं जारी रखने के निर्देश दिए गए थे, तो जेल में दाखिल करते समय संबंधित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित क्यों नहीं की गई? क्या प्रशासन ने हार्ट अटैक और कार्डियोलॉजिस्ट की रिपोर्टों को ध्यान में रखा था? क्या जेल में आपातकालीन हृदय उपचार और चौबीसों घंटे चिकित्सा निगरानी की पर्याप्त व्यवस्था है?
परिजनों एवं प्रतिनिधियों ने सक्षम न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग करने की बात कही है। उनका कहना है कि यह मामला किसी विशेष सुविधा या विशेषाधिकार का नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेशों की पालना और गंभीर रूप से बीमार वृद्ध बंदी को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का है।
उनके अनुसार, जेल में निरुद्ध होने के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति को उपचार, स्वास्थ्य सुरक्षा और मानवीय गरिमा के अनुरूप बुनियादी सुविधाएं प्राप्त करने का अधिकार है। ऐसे में जेल प्रशासन को आसाराम बापू की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति, चिकित्सा जरूरतों और दैनिक आवश्यकताओं के अनुरूप तत्काल उचित व्यवस्था करनी चाहिए।