तस्वीर में सेठ रंगलाल कोठारी राजकीय महाविद्यालय के कक्ष में एबीवीपी के कार्यकर्ता और विद्यार्थी उच्च शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए नजर आ रहे हैं।

राजसमंद, 7 अगस्त। राजस्थान में छात्रसंघ चुनावों की शीघ्र बहाली सहित उच्च शिक्षा से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने सेठ रंगलाल कोठारी राजकीय महाविद्यालय में प्रदर्शन करते हुए प्राचार्य के माध्यम से उच्च शिक्षा मंत्री, राजस्थान सरकार के नाम पाँच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से विद्यार्थियों ने छात्रसंघ चुनावों की शीघ्र बहाली, समस्त राज्य विश्वविद्यालयों में समान अकादमिक कैलेंडर लागू करने, समयबद्ध एवं पारदर्शी परीक्षा परिणाम घोषित करने, विश्वविद्यालयों में रिक्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक पदों पर नियमित नियुक्तियाँ करने तथा प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों में नियमित प्राचार्यों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग रखी।



 छात्रसंघ अध्यक्ष देवेश पालीवाल ने बताया कि महाविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नेतृत्व निर्माण की प्रयोगशालाएँ हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान में वर्षों से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराना लाखों विद्यार्थियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उनके अनुसार छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, उत्तरदायित्व एवं लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास करते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की नीतियों के कारण चुनाव लगातार प्रभावित रहे, लेकिन अब वर्तमान सरकार को बिना किसी विलंब के छात्रसंघ चुनावों की घोषणा कर प्रत्येक वर्ष नियमित एवं समयबद्ध चुनाव सुनिश्चित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद इस मांग को लेकर प्रदेशभर में संघर्षरत है और जब तक छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं होंगे, तब तक आंदोलन निरंतर जारी रहेगा।

पूर्व जिला संयोजक गोपाल कुमावत ने कहा कि राजस्थान की उच्च शिक्षा व्यवस्था अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र लगातार विलंबित हो रहे हैं, परीक्षा परिणाम समय पर घोषित नहीं हो रहे हैं, मूल्यांकन प्रक्रिया की त्रुटियाँ विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं तथा शिक्षकों एवं कर्मचारियों के हजारों रिक्त पदों के कारण शिक्षण व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि अधिकांश राजकीय महाविद्यालय स्थायी प्राचार्यों के अभाव में संचालित हो रहे हैं। सरकार को इन सभी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस एवं समयबद्ध कार्ययोजना बनानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं, जिन्हें शीघ्र बहाल किया जाना आवश्यक है।

विद्यार्थी परिषद ने चेतावनी दी कि यदि विद्यार्थियों की इन न्यायोचित मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन किए जाएंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

इस दौरान प्रद्युम्न सिंह, कल्पेश कुमावत, किशन सिंह, कमलेश सुरेचा, महेश कुमावत, रेणुका, लक्षिता, मनीषा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। ज्ञापन के माध्यम से परिषद ने छात्रसंघ चुनाव बहाली सहित उच्च शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग दोहराई।

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