सायरा: विद्या निकेतन में विज्ञान मेला व मातृ सम्मेलन, लगे 152 मॉडल
छात्रों ने पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण पर 152 मॉडल प्रदर्शित किए, वहीं अधिकारियों व वक्ताओं ने बच्चों के सर्वांगीण विकास में मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित किया।
तस्वीर में सायरा के विद्यालय प्रांगण में शामियाने के नीचे छात्र विज्ञान प्रदर्श देखते हुए।
विद्या निकेतन उच्च प्राथमिक विद्यालय सायरा में आयोजित विज्ञान मेले एवं मातृ सम्मेलन में विद्यार्थियों की प्रतिभा, मातृशक्ति की सहभागिता और अतिथियों के प्रेरणादायी विचारों का संगम देखने को मिला। विज्ञान मेले में विद्यालय के नन्हे वैज्ञानिकों ने अपनी कल्पनाशक्ति और वैज्ञानिक सोच को मॉडल एवं प्रदर्शों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कुल 152 आकर्षक एवं उपयोगी विज्ञान प्रदर्श लगाए।
विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, स्वच्छता, कृषि एवं दैनिक जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों पर मॉडल तैयार किए। बच्चों ने अपने प्रदर्शों की कार्यप्रणाली और उपयोगिता को अतिथियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों के सामने आत्मविश्वास के साथ समझाया। विज्ञान मेले में लगाए गए विभिन्न स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे।
प्रदर्शों का निरीक्षण मोहन सिंह जी, गिरीश जी नागदा, गोपाल जी गर्ग, हिना राजपूत, भूमिका शर्मा, हितेश शर्मा एवं सपना लोहार ने किया। निरीक्षण के दौरान अतिथियों ने विद्यार्थियों से मॉडल से संबंधित प्रश्न पूछकर उनकी समझ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जाना। उन्होंने बच्चों की मेहनत और रचनात्मकता की सराहना भी की।
विज्ञान मेले के साथ आयोजित मातृ सम्मेलन की अध्यक्षता चंद्रकांता जी जैन, पूर्व सरपंच सायरा ने की। मुख्य अतिथि महेंद्र जी पालीवाल, अतिरिक्त मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सायरा रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता माँगी लाल जी सेन, खंड संघचालक सायरा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में आशा जी मीना, मीरा जी लोहार एवं निधि जी नागदा उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि महेंद्र जी पालीवाल ने कहा कि बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देने के बजाय उन्हें प्रयोग एवं गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर दिए जाने चाहिए। विज्ञान मेले में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए 152 प्रदर्श बच्चों की जिज्ञासा, प्रतिभा और वैज्ञानिक सोच का परिचायक हैं। उन्होंने माताओं से बच्चों की शिक्षा के साथ उनके संस्कार एवं व्यक्तित्व निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता माँगी लाल जी सेन ने कहा कि माता बच्चे की प्रथम गुरु होती है। बच्चे के जीवन में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, राष्ट्रभाव एवं सामाजिक जिम्मेदारी का होना भी आवश्यक है। उन्होंने माताओं से बच्चों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें निरंतर प्रोत्साहित करने तथा घर और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं माताओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। अभिभावकों ने बच्चों के विज्ञान प्रदर्शों और स्टॉलों का अवलोकन कर उनकी प्रतिभा की सराहना की। शिक्षकों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए उनकी जिज्ञासा, प्रयोगशीलता एवं रचनात्मकता को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम में दलपत सिंह, त्रिभुवन व्यास, गणेश लोहार सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। सभी ने विज्ञान मेले एवं मातृ सम्मेलन के सफल आयोजन में सहयोग करते हुए विद्यार्थियों एवं माताओं का उत्साहवर्धन किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों ने कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ सीखने, सोचने, प्रयोग करने और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करते हैं। विज्ञान मेले एवं मातृ सम्मेलन ने विद्यालय में शिक्षा, संस्कार और रचनात्मकता का वातावरण तैयार किया।