खेरवाड़ा के गोदावरी बांध में जलस्तर घटा, गर्मियों में पेयजल संकट की आशंका
मानसून की बेरुखी से बांध 12 फीट खाली, विकास मंच ने टैंकर आपूर्ति और नए ट्यूबवेल के लिए आपात योजना की मांग की।
तस्वीर में गोदावरी बांध की दीवार और घटते जलस्तर का दृश्य दिखाई दे रहा है।
खेरवाड़ा नगर की लाइफ लाइन कहे जाने वाले प्रमुख पेयजल स्रोत गोदावरी बांध में इस बार पर्याप्त पानी नहीं है। मानसून की बेरुखी के चलते बांध लगभग 12 फीट खाली पड़ा है। यदि मानसून के अंतिम दौर में बांध के कैचमेंट क्षेत्र में तेज बारिश नहीं हुई तो आगामी ग्रीष्मकाल में नगरवासियों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में खेरवाड़ा विकास मंच ने प्रशासन और संबंधित विभाग से गर्मियों से पहले पेयजल की आपात योजना तैयार करने की मांग की है।
खेरवाड़ा विकास मंच के संयोजक नरेन्द्र पंचोली ने बताया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने 15 मई 1968 को गोदावरी बांध सिंचाई परियोजना का शिलान्यास किया था। लंबे समय बाद जनसमूह की मांग पर बांध को पाइपलाइन के माध्यम से नगर की पेयजल आपूर्ति से जोड़ा गया। निकटवर्ती गांव के डूब क्षेत्र में आने के कारण बांध की ऊंचाई नहीं बढ़ाई जा सकी। इसके चलते पूर्व में भी बारिश की कमी, अकाल एवं प्रशासनिक कुप्रबंधन के कारण नगरवासियों को दो बार भीषण पेयजल संकट का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्रवासियों की मांग पर तत्कालीन जलदाय मंत्री सुशील कटारा की अनुशंसा से लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से नगर में नई टंकियों का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने तथा फिल्टर प्लांट स्थापना के कार्य किए गए। वहीं विधायक डॉ. दयाराम परमार के कार्यकाल में बांध के लीकेज की मरम्मत के साथ सैकड़ों ट्रक मिट्टी निकलवाकर करीब दो वर्ष पूर्व बांध को गहरा करवाया गया था। इसके बावजूद इस वर्ष बांध में पर्याप्त पानी नहीं है। पंचोली ने आशंका जताई कि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो गर्मियों में स्थिति गंभीर हो सकती है।
पंचोली ने संबंधित विभाग से अभी से ग्रीष्मकालीन पेयजल आपात योजना तैयार करने, पाइपलाइनों के लीकेज तत्काल बंद करवाने तथा नगर में खुले पड़े नलों पर टोंटियां लगवाने के लिए उपभोक्ताओं को पाबंद करने की मांग की। उन्होंने पानी की बर्बादी रोकने के लिए जलापूर्ति के समय की सख्ती से पालना करवाने की भी मांग रखी।
जिन क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति में अधिक परेशानी रहती है, वहां गर्मियों के लिए अभी से टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की कार्ययोजना तैयार करने की मांग की गई है। गोदावरी बांध और विभाग के ट्यूबवेलों में पानी की कमी को देखते हुए आवश्यकता वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त ट्यूबवेल खुदवाने की भी मांग रखी गई।
जलदाय विभाग खेरवाड़ा के सहायक अभियंता आलोक गरासिया ने बताया कि वर्तमान में गोदावरी बांध में लगभग 15 फिट पानी बचा हुआ है। सिंचाई के लिए यदि सप्लाई नहीं की गई तो जून 27 तक कस्बे में जलापूर्ति जारी रह सकती है। यदि समस्या ज्यादा हुई तो दिसंबर के बाद या तो जलापूर्ति का समय कुछ कम किया जाएगा अथवा तीसरे दिन जलापूर्ति की जाएगी।
गरासिया ने बताया कि विभाग की ओर से उच्च अधिकारियों से प्रतिदिन टैंकर से जलापूर्ति किए जाने की स्वीकृति के लिए पत्र प्रेषित किया जा रहा है, क्योंकि ट्यूबवेल में भी जलस्तर काम रहता है। इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर टैंकरों से ही आपूर्ति करने की योजना बनाई जा रही है।
खेरवाड़ा विकास मंच के संयोजक ने कहा कि समय रहते ठोस एवं दीर्घकालीन व्यवस्था की गई तो आगामी गर्मियों में नगरवासियों को पेयजल संकट से बचाया जा सकता है। उन्होंने प्रशासन एवं संबंधित विभाग से तत्काल प्रभाव से तैयारी शुरू करने की अपील की, ताकि भविष्य में जनता को पेयजल के लिए परेशान न होना पड़े। वर्तमान में गोदावरी बांध एवं उसके जल स्तर की स्थिति आने वाले समय में पेयजल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।