पुणे में पानी की आपूर्ति और टैंकरों की निगरानी के लिए घोषित ओटीपी आधारित व्यवस्था तथा सिविक मिरर में प्रकाशित रिपोर्ट।   

पुणे में पानी की किल्लत के बीच टैंकरों के जरिए जलापूर्ति में पारदर्शिता लाने के लिए घोषित OTP आधारित टैंकर प्रणाली छह महीने बाद भी पूरे शहर में लागू नहीं हो सकी है। सजग नागरिक मंच के अध्यक्ष विवेक वेलणकर ने इस देरी पर सवाल उठाते हुए नगर निगम आयुक्त से पूछा है कि आखिर इस योजना की वास्तविक स्थिति क्या है और इसे सभी टैंकर पॉइंट पर कब तक लागू किया जाएगा। उन्होंने केवल घोषणाएं करने के बजाय व्यवस्था को जमीन पर उतारने की मांग की है, ताकि नागरिकों को पानी की आपूर्ति में कथित मनमानी और कालाबाजारी से राहत मिल सके।

नगर निगम ने जलापूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बनाने के उद्देश्य से OTP आधारित टैंकर प्रबंधन प्रणाली शुरू करने की घोषणा की थी। इसके तहत पाषाण, बाणेर, म्हालुंगे, बालेवाड़ी सहित पूरे पुणे शहर में यह व्यवस्था लागू करने की बात कही गई थी। हालांकि, विवेक वेलणकर ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि सूस और म्हालुंगे को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में अब तक यह प्रणाली शुरू नहीं हुई है। ऐसे में शहरव्यापी पारदर्शिता लाने के दावे और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

वेलणकर के अनुसार, सूस और म्हालुंगे के लिए नगर निगम द्वारा विकसित प्रणाली की खबर सबसे पहले ‘सिविक मिरर’ ने प्रकाशित की थी। इस पायलट प्रोजेक्ट को राज्यभर में विस्तारित करने का मुद्दा भी ‘सिविक मिरर’ की 29 जून को प्रकाशित खबर ‘पुणे का OTP टैंकर पैटर्न राज्य में हर जगह’ में उठाया गया था। इस व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं में टैंकर माफिया की मनमानी पर रोक लगाना और GPS के माध्यम से प्रत्येक टैंकर की निगरानी करना शामिल है।

प्रणाली के तहत जब टैंकर निर्धारित स्थान पर पानी पहुंचाता है, तो संबंधित नागरिक या सोसायटी को SMS के जरिए OTP प्राप्त होता है। टैंकर की फेरी पूरी होने की पुष्टि तभी दर्ज होती है, जब यह OTP सिस्टम में दर्ज किया जाता है। इस प्रक्रिया में पानी प्राप्त करने वाले नागरिक या सोसायटी की भागीदारी अनिवार्य है। इसका उद्देश्य केवल कागजों पर टैंकर की फेरी दर्ज करने के बजाय यह सुनिश्चित करना है कि पानी वास्तव में निर्धारित स्थान तक पहुंचा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि इस व्यवस्था से फर्जी रिकॉर्ड, पानी पहुंचाने में देरी और गड़बड़ी की आशंका को रोकने में मदद मिल सकती है। लेकिन जब निगरानी की यह प्रणाली पूरे शहर में लागू ही नहीं है, तो नागरिकों को इसका लाभ कैसे मिलेगा? वेलणकर का कहना है कि व्यवस्था को केवल कुछ क्षेत्रों तक सीमित रखने से पूरे पुणे में टैंकर से होने वाली जलापूर्ति में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जा सकती। जिस प्रणाली के राज्यव्यापी विस्तार की चर्चा हुई थी, उसकी पुणे में ही अधूरी स्थिति अब सवालों के घेरे में है।

सूस और म्हालुंगे में पायलट प्रोजेक्ट के बाद शहर के अन्य क्षेत्रों के नागरिकों को भी इस व्यवस्था के लागू होने की उम्मीद थी। ऐसे में बाकी इलाकों के लोगों को अब तक इंतजार क्यों करना पड़ रहा है, यह अहम सवाल बन गया है। जलापूर्ति में पारदर्शिता का आकलन घोषणाओं और प्रचार के आधार पर नहीं, बल्कि प्रत्येक टैंकर फेरी के विश्वसनीय रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण से होना चाहिए। इसी वजह से सभी टैंकर पॉइंट पर एक समान निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई गई है।

वेलणकर ने नगर निगम से ज्ञापन पर ध्यान देते हुए पूरे शहर में प्रणाली लागू करने का स्पष्ट समयबद्ध कार्यक्रम घोषित करने की मांग की है। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि किन क्षेत्रों में OTP आधारित व्यवस्था शुरू हो चुकी है और शेष इलाकों में इसे कब तक लागू किया जाएगा। टैंकरों की निगरानी के लिए घोषणा किए छह महीने बीत जाने के बाद अब नागरिकों को यह जानने का इंतजार है कि पानी की आपूर्ति में कथित लूट और मनमानी रोकने के लिए यह व्यवस्था वास्तव में कब प्रभावी होगी।

वेलणकर ने यह चेतावनी भी दी है कि पानी में कटौती के कारण आने वाले समय में टैंकरों की मांग बढ़ सकती है। ऐसे में नागरिकों को लूट से बचाने के लिए सभी टैंकर पॉइंट पर OTP प्रणाली तत्काल लागू करना जरूरी है। पानी की जरूरत बढ़ने के दौरान नियंत्रण व्यवस्था का पीछे रह जाना नागरिकों के हित में नहीं है, यह रुख उन्होंने अपने ज्ञापन में रखा है।

छह महीने पहले घोषित योजना किस चरण में है, बाकी क्षेत्रों में इसे अब तक क्यों शुरू नहीं किया गया और शहर के सभी टैंकर पॉइंट को इस व्यवस्था से कब जोड़ा जाएगा, इन सवालों के जवाब नगर निगम से अपेक्षित हैं। नागरिकों को पानी मिलने की पुष्टि करने वाली प्रणाली का वास्तविक रूप से उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है, क्योंकि केवल घोषणा से जलापूर्ति संबंधी लेनदेन पर उठने वाले संदेह दूर नहीं होंगे। टैंकर की फेरी पूरी हुई या नहीं, पानी निर्धारित स्थान पर पहुंचा या नहीं और ग्राहक ने इसकी पुष्टि की या नहीं, इन सभी बिंदुओं को OTP प्रणाली से जोड़ा गया है। इसलिए इसके विस्तार में देरी केवल तकनीकी क्रियान्वयन का मामला नहीं, बल्कि जलापूर्ति व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ा है। विवेक वेलणकर के ज्ञापन ने नगर निगम की घोषणाओं और वास्तविक कार्रवाई के बीच के अंतर को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है।