तस्वीर में दिख रही अदालत की मेज पर रखी हथौड़ी पुणे पुलिस द्वारा नशीली दवाओं के आदी लोगों के पुनर्वास और कानूनी राहत से जुड़ी कार्रवाई को दर्शाती है।

पुणे में नशे के खिलाफ कार्रवाई के साथ नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार और पुनर्वास का अवसर देने के लिए पुलिस ने संवेदनशील पहल की है। पुलिस ने परिमंडल तीन के अंतर्गत वारजे, नऱ्हे, उत्तमनगर और नांदेड सिटी पुलिस थानों के माध्यम से 12 नशे के आदी लोगों को किरकटवाड़ी स्थित आत्मनिर्भर सोशल फाउंडेशन के नशामुक्ति केंद्र में उपचार के लिए भेजा। इन सभी ने एक महीने का उपचार पूरा कर लिया है। इनमें से नौ लोगों को अदालत से दोषमुक्ति (डिस्चार्ज) मिल गई है, जबकि तीन के मामले न्यायालय में लंबित हैं। यह पहल पुलिस उपायुक्त डॉ. सागर कवडे के मार्गदर्शन में संचालित की गई।

पुलिस की इस मुहिम में अमली पदार्थों का सेवन करने वाले लोगों को केवल अपराध के दायरे में देखने के बजाय उन्हें नशे की लत से बाहर निकालकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने पर जोर दिया गया। उपचार पूरा होने के बाद संबंधित मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए न्यायालय में रिपोर्ट पेश की गई।

वारजे पुलिस ने तीन लोगों को उपचार के लिए भेजा था। इनमें से एक को अदालत से डिस्चार्ज मिल गया, जबकि दो मामले लंबित हैं। नऱ्हे पुलिस के तीन मामलों में से दो लोगों को न्यायालय से राहत मिली और एक मामला लंबित है। उत्तमनगर और नांदेड सिटी पुलिस ने तीन-तीन लोगों को उपचार के लिए नशामुक्ति केंद्र भेजा था। इन दोनों पुलिस थानों के अंतर्गत आने वाले सभी छह मामलों में संबंधित लोगों को अदालत से डिस्चार्ज मिल गया है।

इस पहल में स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 की धारा 64(अ) का सहारा लिया गया। इस कानूनी प्रावधान के तहत पात्र व्यक्तियों को कानून में निर्धारित शर्तों के अधीन नशामुक्ति का उपचार लेने पर अभियोजन से संरक्षण मिल सकता है। अर्थात, संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार उस अपराध के लिए न्यायालय में मुकदमा चलाए जाने से राहत मिल सकती है। पुलिस ने इस प्रावधान के माध्यम से नशे की लत से जूझ रहे लोगों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास का अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

पुणे पुलिस की इस पहल में नशीले पदार्थों की बिक्री करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई और नशे के आदी लोगों के लिए उपचार एवं पुनर्वास की व्यवस्था को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा गया है। नशीले पदार्थों की आपूर्ति शृंखला पर सख्त कार्रवाई के साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों को उपचार के जरिए दोबारा जीवन शुरू करने का अवसर देना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। यह पहल इस बात पर केंद्रित है कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि नशे के आदी लोगों का पुनर्वास भी आवश्यक है।