पुणे में नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर अगवा करने और उसके साथ बार-बार दुष्कर्म करने के मामले में सत्र न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ए. एस. गांधी ने आरोपी महंमद साकिब शफी अहमद शेख को 20 साल के सश्रम कारावास और 1 लाख 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इस मामले में पीड़िता, उसकी मां और चिकित्सा अधिकारियों की गवाही के साथ न्यायालय में पेश किए गए अहम साक्ष्य आरोपी को दोषी ठहराने में निर्णायक साबित हुए।

यह मामला वर्ष 2020 में सामने आया था। आरोपी महंमद साकिब शफी अहमद शेख (उम्र 32 वर्ष, निवासी नागपाड़ा, मुंबई) ने एक नाबालिग लड़की को अपने प्रेमजाल में फंसाया। लड़की के नाबालिग होने की जानकारी होने के बावजूद उसने उसकी असहाय स्थिति का फायदा उठाया और शादी का झांसा दिया। इसके बाद आरोपी लड़की को उसके घर से चुपचाप भगाकर मुंबई ले गया।

मुंबई पहुंचने के बाद आरोपी ने नागपाड़ा और आसपास के अलग-अलग इलाकों में समय-समय पर किराये पर कमरे लिए। इन कमरों में लड़की को रखकर उसकी इच्छा के विरुद्ध और उसकी नाबालिग उम्र का फायदा उठाते हुए उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। लड़की के अचानक लापता होने से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों ने तत्काल पुणे के समर्थ पुलिस थाने पहुंचकर लड़की के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।

समर्थ पुलिस थाने में वर्ष 2020 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के आधार पर जांच करते हुए मुंबई में आरोपी की तलाश की और पीड़िता को मुक्त कराया। जांच में सामने आया कि आरोपी ने लड़की को अलग-अलग स्थानों पर किराये के कमरों में रखकर उसके साथ अत्याचार किया था। पुलिस ने महंमद साकिब शेख को गिरफ्तार कर लिया और आवश्यक साक्ष्य जुटाने के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।

मामले की सुनवाई के दौरान विशेष सरकारी वकील लीना पाठक ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी पैरवी की। इस गंभीर मामले में अभियोजन पक्ष ने कुल छह गवाहों के बयान दर्ज कराए। सुनवाई के दौरान पीड़िता की गवाही, उसकी मां के बयान, चिकित्सा जांच करने वाले अधिकारियों की गवाही और पुलिस के साक्ष्य महत्वपूर्ण साबित हुए।

सरकारी वकील लीना पाठक ने न्यायालय में पीड़िता का आधिकारिक जन्म प्रमाणपत्र पेश किया, जिससे यह साबित हुआ कि अपराध के समय लड़की नाबालिग थी। इसके अलावा चिकित्सा रिपोर्ट और अन्य फॉरेंसिक साक्ष्य भी न्यायालय के सामने रखे गए। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी ने जानबूझकर यह गंभीर अपराध किया और उसके लिए कठोर सजा दी जानी चाहिए।

बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ए. एस. गांधी ने महंमद साकिब शफी अहमद शेख को दोषी ठहराया। न्यायालय ने उसे 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 लाख 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। फैसले में नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा और ऐसे अपराधों के मामलों में कठोर दंड का महत्व सामने आया।

न्यायालय ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। आदेश के अनुसार, आरोपी से वसूल की जाने वाली 1 लाख 25 हजार रुपये की जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। इसके साथ ही राज्य सरकार की ‘मनोद्‌धैर्य’ योजना के तहत पीड़िता को अतिरिक्त आर्थिक सहायता और मुआवजा दिलाने के निर्देश संबंधित प्राधिकरण को दिए गए। इस फैसले में आरोपी को कठोर सजा देने के साथ पीड़िता के पुनर्वास और आर्थिक सहायता पर भी जोर दिया गया है।

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