तस्वीर में प्रतापगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हाथ आगे बढ़ाकर शपथ लेते लोग।   

प्रतापगढ़ में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को नागरिकों, व्यापारियों और अधिकारियों ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा मानसिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशील रहने की शपथ ली। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नागेंद्र सिंह सिसोदिया ने उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई। साथ ही, जिलेभर के चिकित्सा संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर आमजन को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और इससे जुड़ी समस्याओं के प्रति सचेत किया गया।

सीएमएचओ डॉ. नागेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों महत्वपूर्ण हैं। जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना आवश्यक है, उसी प्रकार मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना भी जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य का व्यक्ति की सोच, व्यवहार, कार्यक्षमता, दैनिक जीवन और सामाजिक संबंधों पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ इससे जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि कई बार लोग मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक समस्याओं को नजरअंदाज कर देते हैं। सामाजिक संकोच के कारण कुछ लोग अपनी परेशानियां दूसरों से साझा करने से भी बचते हैं। इससे समस्या बढ़ सकती है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना और आवश्यकतानुसार उपचार करवाना चाहिए।

डॉ. सिसोदिया ने आमजन से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति भेदभाव न करें और उन्हें सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना समय की आवश्यकता है। परिवार और समाज के लोगों को मानसिक परेशानी से गुजर रहे व्यक्तियों की बात धैर्यपूर्वक सुननी चाहिए तथा उन्हें उचित परामर्श और उपचार लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने और जागरूकता बढ़ाने में प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके लिए मानसिक समस्याओं को समझना और उनसे प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाना जरूरी है।

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर जिलेभर के चिकित्सा संस्थानों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से आमजन को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक समस्याओं के शुरुआती संकेतों की पहचान तथा समय पर परामर्श और उपचार लेने के बारे में जानकारी दी गई। इन कार्यक्रमों के जरिए मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज न करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने के प्रति जागरूक किया गया।

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