प्रतापगढ़ के रीछा गांव में श्मशान घाट की बदहाली पर ग्रामीणों का पंचायत घेराव, 15 दिन में काम शुरू कराने का आश्वासन
प्रतापगढ़ के रीछा गांव में श्मशान घाट की बदहाली को लेकर ग्रामीणों ने पंचायत का घेराव किया। प्रशासन के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ।
तस्वीर में प्रतापगढ़ के नौगांवा ग्राम पंचायत भवन के बाहर प्रदर्शन करते ग्रामीण, जिनमें आगे महिलाएं और पीछे पुरुष खड़े नजर आ रहे हैं।
प्रतापगढ़ जिले की अरनोद पंचायत समिति की ग्राम पंचायत नौगांवा के रीछा गांव में श्मशान घाट पर वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर सोमवार को ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में ग्रामीण ग्राम पंचायत पहुंचे और पंचायत का घेराव कर श्मशान घाट पर बाउंड्रीवाल, अंतिम संस्कार के लिए छप्पर तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
ग्रामीणों ने बताया कि रीछा गांव का श्मशान घाट लंबे समय से उपेक्षा का शिकार है। यहां सुरक्षा के लिए न तो बाउंड्रीवाल बनाई गई है और न ही अंतिम संस्कार के दौरान धूप और बारिश से बचाव के लिए छप्पर की व्यवस्था है। बरसात के मौसम में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान घाट के विकास के लिए पूर्व में स्वीकृति मिलने के बावजूद आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया। उनका कहना है कि आजादी के बाद से अब तक श्मशान घाट का समुचित विकास नहीं होने से ग्रामीणों में लगातार नाराजगी बनी हुई है।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन से श्मशान घाट के विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू कराने की मांग करते हुए कहा कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील घड़ी में लोगों को मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशान होना पड़ता है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही बाउंड्रीवाल, छप्पर और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण शुरू नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
इधर सूचना मिलने पर ग्राम विकास अधिकारी गोपाल मीणा और विकास अधिकारी अशोक कुमार डिंडोर मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से समझाइश की और आश्वासन दिया कि श्मशान घाट पर छप्पर निर्माण का कार्य 15 दिन में शुरू कराया जाएगा, जबकि तारबंदी की बाउंड्रीवाल का कार्य अगले दिन से प्रारंभ करवा दिया जाएगा। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए और धरना-प्रदर्शन समाप्त कर दिया।