सीए की नौकरी छोड़ संयम के मार्ग पर चले अंकित जैन, जन्मभूमि से विदाई पर नम हुईं आंखें
प्रतापगढ़ के अचनेरा गांव में भव्य वरघोड़ा निकाला गया; सीए की नौकरी छोड़ 25 अक्टूबर को दिल्ली के लाल किले में पांच अन्य दीक्षार्थियों के साथ लेंगे दीक्षा।
प्रतापगढ़ के अचनेरा गांव में दीक्षा से पूर्व आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अपने माता-पिता के चरण पखारकर आशीर्वाद लेते बाल ब्रह्मचारी अंकित जैन।
प्रतापगढ़ जिले के अचनेरा गांव में रविवार को बाल ब्रह्मचारी अंकित जैन का भव्य वरघोड़ा निकाला गया। चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की उपाधि हासिल करने और कुछ समय नौकरी करने के बाद अंकित जैन ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम के मार्ग पर चलने का निर्णय लिया है। 25 अक्टूबर को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में उनकी दीक्षा होगी। जन्मभूमि से विदाई के दौरान माता-पिता, भाई और भाभी की नम आंखों ने इस धार्मिक आयोजन को भावुक क्षणों से भर दिया।
अंकित जैन के वरघोड़े की शुरुआत अचनेरा स्थित जैन मंदिर से हुई। यात्रा बरखेड़ी बस स्टैंड होते हुए विद्यालय परिसर पहुंची। इसमें जैन समाज के लोगों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। विद्यालय परिसर में धार्मिक आयोजन हुआ, जहां प्रवचनों के बाद कार्यक्रम का समापन किया गया।
वरघोड़े के दौरान सबसे भावुक दृश्य उस समय सामने आया, जब अंकित जैन ने संयम जीवन अपनाने से पहले अपने माता-पिता के चरण धोए, उनका आशीर्वाद लिया और चरण स्पर्श किए। बेटे को सांसारिक जीवन से विदा कर आध्यात्मिक मार्ग पर भेजते समय माता-पिता के साथ भाई और भाभी की आंखें भी नम हो गईं। परिवार के सदस्यों की आंखों से छलके आंसुओं ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को भी भावुक कर दिया। एक ओर बेटे से बिछड़ने का दर्द था, तो दूसरी ओर उसके त्याग और आध्यात्मिक निर्णय पर गर्व का भाव दिखाई दिया।
अंकित जैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अचनेरा गांव में पूरी की थी। इसके बाद वह चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई के लिए इंदौर गए, जहां सीए की उपाधि हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक नौकरी भी की। हालांकि, वैराग्य की भावना प्रबल होने पर उन्होंने सांसारिक सुख-सुविधाओं को छोड़कर संयम का मार्ग चुनने का निर्णय लिया।
दीक्षा से पहले परिवार की ओर से मंदिर में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और संगीतमय विधान सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भजन संध्या में श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की। इन आयोजनों के बीच अंकित जैन के संयम जीवन की ओर बढ़ते कदमों और परिवार की भावनाओं का विशेष दृश्य देखने को मिला।
25 अक्टूबर को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित होने वाले दीक्षा समारोह में अंकित जैन के साथ अलग-अलग राज्यों के पांच अन्य दीक्षार्थी भी संयम जीवन अपनाएंगे। इस तरह कुल छह दीक्षार्थी दीक्षा ग्रहण करेंगे।
अचनेरा में निकला अंकित जैन का भव्य वरघोड़ा धार्मिक आस्था, त्याग और पारिवारिक भावनाओं का संगम बना। जिस गांव में उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, उसी जन्मभूमि की गलियों से संयम के मार्ग की ओर उनकी विदाई ने लोगों को भावुक कर दिया। सांसारिक जीवन छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपनाने का उनका निर्णय और विदाई के दौरान परिवार की भावनाएं इस आयोजन के प्रमुख दृश्य बने।