यशोभूमि में विश्व फिजियोथेरेपी कांफ्रेंस, फिजियोथेरेपिस्ट्स के लिए उठी मांग
पटना IGIMS के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. रत्नेश चौधरी ने फिजियोथेरेपी सिस्टम ऑफ मेडिसिन की मान्यता और आम लोगों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने की मांग उठाई।
तस्वीर में विश्व फिजियोथेरेपी एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. माइक लउंड्री के साथ डॉ. रत्नेश चौधरी दिख रहे हैं।
नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में विश्व फिजियोथेरेपी कांफ्रेंस के एशिया-पैसिफिक सम्मेलन की शुरुआत के बीच आईजीआईएमएस, पटना के वरिष्ठ फिजियोथेरेपिस्ट एवं योग इंचार्ज डॉ. रत्नेश चौधरी ने फिजियोथेरेपी सिस्टम ऑफ मेडिसिन को मान्यता देने की मांग उठाई। उन्होंने आम लोगों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के नियमों में बदलाव की भी मांग की। सम्मेलन में दुनियाभर से 10 हजार से अधिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें फिजियोथेरेपी डॉक्टर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक और विद्यार्थी शामिल हैं।
डॉ. रत्नेश चौधरी ने कहा कि जब क्रिकेट खिलाड़ियों से लेकर ओलंपिक स्तर के खिलाड़ियों तक के फिटनेस परीक्षण और प्रमाणन में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका होती है, तो आम लोगों को फिटनेस सर्टिफिकेट देने के लिए भी उन्हें अधिकृत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेलों में फिटनेस का विशेष महत्व है और खिलाड़ियों को फिट घोषित करने से पहले 25 से अधिक मानकों पर परीक्षण किया जाता है। ऐसे में बेहतर और स्वस्थ भारत के लिए आम लोगों की फिटनेस पर भी इसी तरह ध्यान देने की जरूरत है।
सम्मेलन के दौरान डॉ. रत्नेश चौधरी ने विश्व फिजियोथेरेपी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. माइक लउंड्री (कनाडा) और नेशनल हेल्थ एंड अलाइड हेल्थ काउंसिल की पहली राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. यगना शुक्ला समेत अन्य विशेषज्ञों से मुलाकात की।
सम्मेलन में बिहार से डॉ. अविनाश, डॉ. अखिलेश समेत सैकड़ों डॉक्टर और फिजियोथेरेपी के विद्यार्थी भी शामिल हुए। फिजियोथेरेपी सिस्टम ऑफ मेडिसिन को मान्यता और आम लोगों के फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने के अधिकार से जुड़ी डॉ. रत्नेश चौधरी की मांग सम्मेलन में उठे प्रमुख मुद्दों में शामिल रही।