प्रवर्तन निदेशालय की जांच और हाई-प्रोफाइल मामलों के संदर्भ में एजेंसी का लोगो और प्रतीक चिह्न दर्शाए गए हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आने वाले समय में मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) से जुड़े मामलों में अपनी कार्रवाई को बेहद तेज करने और दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने की बड़ी तैयारी कर ली है। एजेंसी की योजना है कि 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले हाई-प्रोफाइल मामलों में मुकदमों का ट्रायल तेजी से पूरा किया जाए, ताकि जांच की अवधि को औसतन 4-5 साल से घटाकर करीब 18 महीने तक लाया जा सके।

इस रणनीति के तहत, ईडी के निदेशक राहुल नवीन ने सभी जोनल ऑफिसर्स को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जोन में कम से कम 10 ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों की पहचान करें, जिन्हें अगले 6 से 8 महीनों के भीतर तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जा सके। एजेंसी का मुख्य फोकस इस बात पर है कि ट्रायल शुरू होने से पहले सभी तैयारियां पुख्ता हों, जो मामले 6 महीने से अधिक समय से संज्ञान लिए जाने का इंतजार कर रहे हैं उनकी हर महीने समीक्षा की जाए, और जो केस 10 साल से पेंडिंग हैं उनकी विशेष निगरानी हो।

ईडी की इस सख्त होती कार्यशैली से कई बड़े राजनीतिक चेहरों की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। वर्तमान में कई हाई-प्रोफाइल नेताओं के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले चल रहे हैं, जैसे:

  • कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सोनिया गांधी (नेशनल हेराल्ड घोटाला केस)
  • लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव (आईआरसीटीसी घोटाला केस)
  • झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (रांची बड़गाईं जमीन फर्जीवाड़ा केस)
  • आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल (दिल्ली शराब नीति घोटाला केस)
  • कांग्रेस नेता पी चिदंबरम और कार्ति चिदंबरम (आईएनएक्स मीडिया और एयरसेल-मैक्सिस केस)

इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने भी बल और संसाधनों को बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। 1 जनवरी, 2027 से ईडी में कर्मचारियों की संख्या में बड़ा विस्तार किया जाएगा, जिसके तहत स्वीकृत पदों की संख्या 2,029 से बढ़ाकर 3,256 (लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि) कर दी जाएगी। इसके अलावा, पीएमएलए जोन की संख्या बढ़ाकर 50 कर दी जाएगी और एजेंसी की फंक्शनल यूनिट्स को भी 131 से बढ़ाकर 241 किया जा रहा है, ताकि मामलों की जांच और ट्रायल में किसी भी तरह की सुस्ती न रहे।