तस्वीर में बाईं तरफ कुणाल घोष और दाईं तरफ अभिषेक बनर्जी समर्थकों संग दिख रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के बेलीघाटा विधायक कुणाल घोष की कार पर लगातार दूसरे दिन हमले के आरोप के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कुणाल घोष पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि 18 घंटे के भीतर यह दूसरी बार है, जब कुणाल घोष को निशाना बनाया गया है। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि हथियारबंद लोगों ने एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को निशाना बनाया और परेशान किया।

अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कुणाल घोष पर हमला इसलिए किया गया, क्योंकि उन्होंने कथित तौर पर पाला बदलने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि अगर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि की सुरक्षा का यह हाल है तो पश्चिम बंगाल के आम नागरिकों के साथ क्या हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वह कुणाल घोष पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हैं और ऐसी घटनाओं को लेकर गंभीर चिंता है।

अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने राज्यपाल से पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजी और कोलकाता पुलिस के आयुक्त से बात करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हमले में शामिल हर व्यक्ति की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि हिंसा और डराने-धमकाने का यह सिलसिला बंद होना चाहिए।

अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने अपनी पोस्ट में बीजेपी के लिए '#VoteChor' शब्द का इस्तेमाल करते हुए पूछा कि अगर बीजेपी को लगता है कि उसे पश्चिम बंगाल में जनता का जनादेश मिला है तो फिर उन लोगों को डराने और दबाव में लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है, जो पाला बदलने से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों को शांति, सुरक्षा और कानून का राज चाहिए। अभिषेक ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक हिंसा की कोई जगह नहीं है, चाहे इसके पीछे कोई भी हो।

इससे पहले बेलीघाटा विधायक कुणाल घोष ने दावा किया था कि उत्तरपाड़ा की घटना के बाद उनके साथ फिर से हमला हुआ है। उनके मुताबिक, बेलीघाटा में एक कार्यक्रम में जाने से पहले उनकी कार का पीछा किया गया और बाइक सवार लोगों ने वाहन को घेर लिया। कुणाल घोष का आरोप है कि फूलबागान मोड़ के पास उनकी कार को घेरने की कोशिश हुई और इसके बाद ईंट-पत्थर से हमला किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों के हाथ में हथौड़े और रिवॉल्वर थे। बाद में वह किसी तरह नारकेलडांगा थाने पहुंचे।

कुणाल घोष ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें डर है कि हमलावर किसी भी दिन उनकी जान ले सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सुरक्षा में तैनात लोगों को भी हथियार निकालने पड़े। उन्होंने कहा कि उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता और वह अपनी बात कहते रहेंगे।

इससे एक दिन पहले उत्तरपाड़ा में भी कुणाल घोष की कार को रोककर उस पर अंडे और पत्थर फेंकने और शीशे तोड़ने का आरोप लगा था। घटना उस समय हुई थी, जब वह हुगली के श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की सभा में शामिल होने जा रहे थे। कुणाल घोष ने आरोप लगाया था कि उनकी कार को रास्ते में रोका गया और भीड़ ने हमला किया। घटना में कार का शीशा टूट गया था। लगातार दो दिनों में सामने आए इन आरोपों के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा को लेकर अभिषेक बनर्जी की प्रतिक्रिया ने मामले को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

Tags: