गोद में बच्चे और अपनों सा अपनापन: बालाघाट के जगला गांव में आदिवासियों के बीच पहुंचे राहुल गांधी का अनूठा और मानवीय अंदाज|
राहुल गांधी ने बालाघाट के जगला गांव में बैगा आदिवासियों से मुलाकात कर बाल मृत्यु और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरा।
राहुल गांधी बालाघाट के जगला गांव में बैगा आदिवासी परिवार के बच्चे को अपनी गोद में उठाए हुए नजर आ रहे हैं।
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल जगला गांव में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला, जहां वे किसी वीआईपी दौरे की औपचारिकता से दूर सीधे आम जनता के बीच पहुंचे। बैगा आदिवासी परिवारों के इस दौरे के दौरान उन्होंने बच्चों को अपनी गोद में उठाया, बुजुर्गों और महिलाओं से सहजता से बातचीत की और जमीन पर बैठकर उनकी तकलीफों को करीब से समझा। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, वे करीब एक घंटे तक गांव में रुके और स्थानीय निवासियों का हालचाल जाना।
इस दौरे के दौरान राहुल गांधी सफेद टी-शर्ट और खाकी पैंट में नजर आए, और उन्होंने बच्चों को दुलारने के साथ-साथ ग्रामीणों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। इस मुलाकात के दौरान ग्रामीणों ने उन्हें अपने बच्चों की बीमारी, इलाज के अभाव और गांव में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की कमी के बारे में विस्तार से बताया। उल्लेखनीय है कि बालाघाट के बिरसा ब्लॉक में पिछले कुछ महीनों के दौरान 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिसे लेकर सरकारी स्तर पर मलेरिया, कुपोषण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया गया है।
ग्रामीणों से बातचीत करने के बाद राहुल गांधी ने मौजूदा व्यवस्था और सरकार पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है मानो देश के इन दूरदराज इलाकों के लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया हो और यहां केंद्र या मध्य प्रदेश सरकार का कोई अस्तित्व ही न हो। उन्होंने आदिवासियों की जमीन, मनरेगा, वन अधिकार कानून के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रही है और आदिवासी परिवारों के अधिकारों से जुड़े इन गंभीर मामलों को संसद में उठाया जाएगा।
इस दौरे के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है, जहां एक ओर विपक्ष सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, वहीं मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने इस दौरे को महज एक राजनीतिक स्टंट करार दिया है। इस पूरी घटना ने एक बार फिर आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर, बाल मृत्यु दर और सरकारी योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर चल रही बहस को राष्ट्रीय स्तर पर गरमा दिया है।