विशाखा राउत का कुनबी जाति प्रमाण पत्र रद्द, बीएमसी सदस्यता पर मंडराया संकट
विशाखा राउत का कुनबी जाति प्रमाण पत्र रद्द होने से बीएमसी सदस्यता पर संकट गहरा गया है। अब सदन में अंतिम निर्णय होगा।
मुंबई के दादर जैसे महत्वपूर्ण इलाके से चुनाव जीतकर आईं शिवसेना (ठाकरे गुट) की वरिष्ठ नेता और पूर्व महापौर विशाखा राउत को बड़ा झटका लगा है। पालघर जिला प्रशासन की जाति प्रमाण पत्र जांच समिति ने उनका कुनबी जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद उनकी नगरसेवक पद की सदस्यता पर संकट खड़ा हो गया है।
जांच समिति ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि पालघर के उपविभागीय अधिकारी को विशाखा राउत का जाति प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार ही नहीं था। इसके अलावा, विशाखा राउत ने अपने समर्थन में जिन लोगों के कुनबी जाति प्रमाण पत्र पेश किए थे, उनके साथ उनका सीधा रक्त संबंध भी साबित नहीं हो पाया।
समिति के आदेश के अनुसार, विशाखा राउत को अगले 15 दिनों के भीतर अपना पुराना जाति प्रमाण पत्र जमा कराना होगा। हालांकि, इस फैसले के खिलाफ उनके पास कोंकण विभाग के संभागीय आयुक्त के समक्ष 30 दिनों के भीतर अपील दायर करने का कानूनी विकल्प उपलब्ध है।
समिति ने विशाखा राउत को मुंबई शहर के सक्षम प्राधिकारी के पास अपने सभी वैध दस्तावेजों के साथ नए सिरे से आवेदन करने का निर्देश भी दिया है।
वहीं, विशाखा राउत का कहना है कि उनके पास अपने दादा के समय से जाति से जुड़े वैध रिकॉर्ड मौजूद हैं और पालघर के अधिकारियों को ऐसा फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है।
यदि विशाखा राउत की नगरसेवक सदस्यता आधिकारिक रूप से रद्द होती है, तो चुनाव में दूसरे स्थान पर रहीं शिंदे गुट के विधायक सदा सरवणकर की बेटी प्रिया सरवणकर को इस सीट पर मौका मिल सकता है।
बता दें कि विशाखा राउत वार्ड क्रमांक 191 से चुनाव जीतकर आई थीं। अब यह मामला बीएमसी सदन के सामने रखा जाएगा, जिसके बाद उनकी सदस्यता पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद मुंबई की राजनीति में ठाकरे और शिंदे गुट के बीच खींचतान और तेज होने के आसार हैं।